कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG)

कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG) एक शल्य चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य हृदय की मांसपेशियों (मायोकार्डियम) तक रक्त प्रवाह को बेहतर बनाना है।

जब एक या अधिक कोरोनरी आर्टरी (धमनियाँ) प्लाक (वसा और कोलेस्ट्रॉल के जमाव) के कारण संकरी या अवरुद्ध हो जाती हैं, तब यह सर्जरी की जाती है। CABG रक्त प्रवाह के लिए एक नया मार्ग बनाती है, जिससे हृदय की मांसपेशियों तक रक्त आपूर्ति पुनः स्थापित होती है, छाती में दर्द कम होता है और भविष्य में हार्ट अटैक का खतरा घटता है।

CABG की आवश्यकता कब होती है?

डॉक्टर आमतौर पर CABG का परामर्श उन रोगियों को देते हैं जिनमें कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ (CAD) उन्नत (एडवांस) या गंभीर अवस्था में होती है।

कई मरीजों में CABG कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ के उपचार का पहला और सबसे उपयुक्त विकल्प होता है। कुछ मरीजों में यह सर्जरी तब सुझाई जाती है जब दवाओं या एंजियोप्लास्टी से लक्षणों में पर्याप्त राहत नहीं मिलती। इस बीमारी के सामान्य लक्षणों में सीने में दर्द या भारीपन, थकान और सांस फूलना शामिल हैं।

CABG जीवनरक्षक भी सिद्ध हो सकती है, विशेष रूप से उन मरीजों के लिए जिनकी कई धमनियाँ अवरुद्ध हैं या जिनमें ‘लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी’ प्रभावित है।

CABG सर्जरी कैसे की जाती है?

इस प्रक्रिया में सर्जन शरीर के किसी अन्य हिस्से — जैसे पैर, हाथ या छाती — से एक स्वस्थ रक्तवाहिनी (ब्लड वेसल) निकालते हैं और उसे अवरुद्ध धमनी (ब्लॉक्ड आर्टरी)

के आगे जोड़ देते हैं। इससे हृदय की मांसपेशियों तक रक्त का प्रवाह सामान्य हो जाता है।

यह सर्जरी जेनरल एनेस्थीसिया (पूरी तरह बेहोशी की अवस्था) में की जाती है और सामान्यतः पर 4 से 5 घंटे तक चलती है।

रोगी की स्थिति के अनुसार सर्जन एक या अधिक ग्राफ्ट लगा सकते हैं।

CABG के प्रकार

  1. पारंपरिक CABG – इस पद्धति में हृदय को अस्थायी रूप से रोका जाता है और रक्त प्रवाह को ‘कार्डियोपल्मोनरी बाईपास मशीन’ के माध्यम से बनाए रखा जाता है।

  2. ऑफ-पंप CABG – जिसे ‘बीटिंग-हार्ट बाईपास सर्जरी’ भी कहा जाता है, इसमें हृदय की धड़कन को रोके बिना सर्जरी की जाती है। इससे रिकवरी का समय कम हो सकता है और कुछ जोखिम घट सकते हैं।

  3. मिनिमली इनवेसिव CABG – यह सर्जरी छोटे चीरे लगाकर, कभी-कभी रोबोटिक या थोराकोस्कोपिक सहायता से की जाती है, जिससे जल्दी रिकवरी होती है और निशान बहुत कम पड़ते हैं।

CABG सर्जरी के लाभ

  1. CABG से हृदय की मांसपेशियों तक रक्त प्रवाह में उल्लेखनीय सुधार होता है।

  2. रोगियों को एनजाइना (सीने के दर्द) से राहत मिलती है और उनकी व्यायाम क्षमता बढ़ जाती है।

  3. इस सर्जरी का मुख्य लाभ यह है कि यह हार्ट अटैक के जोखिम को कम करती है और जीवन प्रत्याशा (lifespan) को बढ़ाती है।

  4. सर्जरी के बाद अधिकांश मरीज अपने दैनिक जीवन और कार्यक्षमता में स्पष्ट सुधार महसूस करते हैं।

CABG के बाद रिकवरी (Recovery After CABG)

सर्जरी के बाद मरीज को आमतौर पर 5–7 दिन अस्पताल में रहना पड़ता है और पूरी तरह स्वस्थ होने में लगभग 6–12 सप्ताह लगते हैं।

डॉक्टर हृदय की कार्यप्रणाली और चीरे के ठीक होने की प्रक्रिया पर नज़दीकी निगरानी रखते हैं। घर लौटने के बाद ‘कार्डियक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम’ का पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है। इसमें हल्का व्यायाम, संतुलित आहार और धूम्रपान से परहेज़ शामिल हैं। भावनात्मक सहयोग और तनाव प्रबंधन भी रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संभावित जोखिम और जटिलताएँ (Possible Risks and Complications)

अन्य बड़ी सर्जरी की तरह, CABG में भी कुछ जोखिम हो सकते हैं — जैसे रक्तस्राव, संक्रमण, अनियमित हृदय गति (irregular heartbeat) या स्ट्रोक।

हालाँकि, आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और उन्नत पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल के कारण यह सर्जरी अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित है, और अनुभवी केंद्रों में मृत्यु दर (mortality rate) अत्यंत कम है।

जोखिम और जटिलताएँ व्यक्ति-विशिष्ट होती हैं एवं प्रत्येक रोगी के लिए भिन्न भिन्न होती हैं। इसलिए अपने सर्जन से चर्चा करना आवश्यक है ताकि वे आपकी स्थिति के अनुसार संभावित जोखिमों के बारे में जानकारी दे सकें। कुछ मानकीकृत रिस्क कैलकुलेटर, जैसे EuroSCORE II और STS SCORE, सर्जरी में होने वाले संभावित जोखिम का लगभग अनुमान प्रदान करते हैं — आपके सर्जन आपको इसके बारे में विस्तार से समझाएँगे।

CABG के बाद जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes After CABG)

सिर्फ CABG कराने का अर्थ यह नहीं कि कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ पूरी तरह ठीक हो गई है या उसकी प्रगति हमेशा के लिए रुक गई है।

दीर्घकालिक अच्छे परिणाम पाने के लिए स्वस्थ आदतें अपनाना अत्यंत आवश्यक है। मरीजों को फलों, सब्ज़ियों और साबुत अनाज से भरपूर हृदय-हितैषी आहार लेना चाहिए। नियमित व्यायाम, उचित वजन बनाए रखना, और रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल एवं मधुमेह का नियंत्रण बनाए रखना बेहद ज़रूरी है।

मदिरापान एवं धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहना चाहिए ताकि भविष्य में नई रुकावटों की संभावना कम हो।

CABG बनाम एंजियोप्लास्टी (CABG vs. Angioplasty)

CABG और एंजियोप्लास्टी — दोनों ही प्रक्रियाएँ अवरुद्ध धमनियों में रक्त प्रवाह को पुनः स्थापित करने के लिए की जाती हैं, परंतु दोनों की पद्धति अलग होती है।

CABG अधिक आक्रामक (invasive) प्रक्रिया है, पर इसके परिणाम अधिक स्थायी और दीर्घकालिक होते हैं, विशेष रूप से जब कई धमनियाँ अवरुद्ध हों।

एंजियोप्लास्टी अपेक्षाकृत कम आक्रामक होती है और जल्दी रिकवरी होती है, लेकिन कुछ मामलों में धमनी दोबारा संकरी हो सकती है।

उपचार का चुनाव मरीज की हृदय-स्थिति, उम्र और समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। ज्यादातर जटिल और गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ वाले मरीजों में, मधुमेह से ग्रस्त मरीजों में, और उन मरीजों में जिनमें एक से अधिक या कई धमनियाँ अवरुद्ध हैं — CABG सबसे बेहतर और उपयुक्त विकल्प माना जाता है।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

CABG क्या होता है?

CABG (कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी) वह प्रक्रिया है जिसमें हृदय की संकरी/बन्द धमनियों को शरीर की किसी स्वस्थ नस/धमनी से बाईपास किया जाता है, ताकि रक्त का प्रवाह हृदय तक सुरक्षित रूप से पहुँच सके।

जब हृदय की धमनियाँ बहुत अधिक संकरी या अवरुद्ध हो जाती हैं और दवाएँ या स्टेंट पर्याप्त नहीं होते, तब CABG की सलाह दी जाती है। यह छाती का दर्द कम करती है, हार्ट अटैक से बचाव करती है और आयु बढ़ाती है।

व्यक्ति की अपनी नस/धमनी (टाँग, हाथ या छाती से) ली जाती है और उसे बन्द हिस्से के आगे जोड़कर नया मार्ग (बाईपास) बनाया जाता है, जिससे रक्त-प्रवाह फिर सामान्य हो जाता है।

हाँ, यह प्रमुख हृदय-सर्जरी है, लेकिन आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ टीम के कारण यह बहुत सुरक्षित और सफल प्रक्रिया मानी जाती है।

  • ऑन-पम्प: सर्जरी हृदय-फेफड़ा मशीन की सहायता से की जाती है।

  • ऑफ-पम्प (बीटिंग हार्ट सर्जरी): हृदय धड़कता रहता है और मशीन की आवश्यकता नहीं होती।

    किस विधि का उपयोग होगा, यह हृदय की स्थिति पर निर्भर करता है।

सामान्यतः 5–7 दिन, जिनमें 1–2 दिन ICU में रहते हैं।

अधिकांश मरीज 4–6 सप्ताह में सामान्य कार्य करने लगते हैं, यह स्वास्थ्य और रिकवरी पर निर्भर करता है।

ग्राफ़्ट लंबे समय तक सही चले, इसके लिए:

  • रक्त-चाप, शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण रखें

  • धूम्रपान बिल्कुल छोड़ें

  • हृदय-स्वस्थ आहार लें

  • हल्का व्यायाम करें

  • दवाएँ समय पर लें

अधिकांश मरीजों को दोबारा सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती।
ग्राफ़्ट कितने समय तक चलते हैं यह इस पर निर्भर करता है:

  • मधुमेह का नियंत्रण

  • कोलेस्ट्रॉल का स्तर

  • धूम्रपान

  • जीवनशैली

आर्टेरियल ग्राफ़्ट (जैसे LIMA) सबसे अधिक टिकाऊ माने जाते हैं।

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