हृदय ट्यूमर (Cardiac Tumors)
हृदय ट्यूमर ऐसे असामान्य बढ़ाव (गाँठ या मास) हैं जो हृदय के भीतर या उसके आसपास विकसित होते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं—
बिनाइन (गैर-कैंसर) तथा मैलीग्नेंट (कैंसर)।
हालाँकि ये ट्यूमर दुर्लभ होते हैं, लेकिन इनका प्रभाव हृदय की पम्पिंग क्षमता, वाल्वों के कार्य, तथा धड़कन की नियमितता पर पड़ सकता है। यदि समय पर पहचान और उपचार न मिले, तो यह स्थिति गंभीर या जीवन-घातक समस्या पैदा कर सकती है।
हृदय ट्यूमर के प्रकार
हृदय ट्यूमर दो बड़े समूहों में बाँटे जाते हैं—
(1) प्राथमिक ट्यूमर,
(2) द्वितीयक (मेटास्टेटिक) ट्यूमर।
1. प्राथमिक (प्राइमरी) हृदय ट्यूमर
ये ट्यूमर हृदय के भीतर ही उत्पन्न होते हैं। इनमें से अधिकतर बिनाइन (गैर-कैंसर) होते हैं, परंतु उनके कारण रक्त प्रवाह रुक सकता है या धड़कन असामान्य हो सकती है।
आम बिनाइन (गैर-कैंसर) ट्यूमर:
- मिक्सोमा (Myxoma) – सबसे आम हृदय ट्यूमर है; प्रायः बाएँ आलिंद (लेफ्ट एट्रियम) में होता है
- पैपिलरी फाइब्रोएलास्टोमा – अक्सर हृदय वाल्वों पर पाया जाता है
- लाइपोमा – वसा ऊतक से बना ट्यूमर
- रैब्डोमायोमा – बच्चों में अधिक पाया जाता है
दुर्लभ लेकिन मैलीग्नेंट (कैंसर) ट्यूमर:
- एंजियोसारकोमा
- रैब्डोमायोसरकोमा
- फाइब्रोसारकोमा
इनके बढ़ने की गति काफ़ी तेज़ होती है और यह आसपास के ऊतकों में फैल सकते हैं।
2. द्वितीयक (मेटास्टेटिक) हृदय ट्यूमर
ये प्राथमिक ट्यूमर की तुलना में अधिक सामान्य होते हैं।
ये तब बनते हैं जब शरीर के किसी अन्य अंग में विकसित कैंसर फैलकर हृदय तक पहुँच जाता है।
अक्सर यह कैंसर निम्न अंगों से फैलता है—
- फेफड़े
- स्तन
- गुर्दे
- त्वचा (मेलानोमा)
- लिंफ नोड्स या रक्त (लिम्फोमा)
ये प्रायः हृदय की बाहरी झिल्ली (Pericardium) को प्रभावित करते हैं और पेरिकार्डियल द्रव बढ़ा सकते हैं (पेरिकार्डियल इफ़्यूशन)।
हृदय ट्यूमर के लक्षण
लक्षण ट्यूमर के आकार, स्थान और प्रकार पर निर्भर करते हैं।
कई बार कोई लक्षण नहीं होते और जाँच के दौरान इनका पता चलता है।
आम लक्षण:
साँस फूलना / सीढ़ियाँ चढ़ने में दिक्कत
सीने में दर्द
धड़कनों का तेज़ होना
चक्कर आना या बेहोशी छाना
पैरों या पेट में सूजन
अनियमित धड़कन (एरिथमिया)
अत्यधिक थकान या कमजोरी
लेटने पर अधिक साँस फूलना
संभावित गंभीर जटिलताएँ:
कभी-कभी ट्यूमर का छोटा हिस्सा टूटकर रक्त में बह सकता है और—
पक्षाघात (स्ट्रोक)
फेफड़ों में रक्त का थक्का (पल्मोनरी एम्बोलिज्म)
हाथ-पैर की रक्त आपूर्ति रुकना (लिंब इस्कीमिया)
आंतरिक अंगों को क्षति
जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है।
हृदय ट्यूमर की जाँच
सटीक पहचान के लिए उन्नत जाँच आवश्यक होती है क्योंकि ये लक्षण कई अन्य हृदय रोगों जैसे लग सकते हैं।
मुख्य जाँचें:
इकोकार्डियोग्राफी – ट्यूमर देखने की पहली और सबसे महत्वपूर्ण जाँच
सीटी स्कैन
एमआरआई स्कैन – आकार, संरचना और फैलाव जानने के लिए
कार्डियक कैथेटराइजेशन – विशेष परिस्थितियों में
रक्त जाँच
यदि कैंसर की आशंका हो, तो बायोप्सी या शल्यचिकित्सा द्वारा निकालकर पुष्टि की जाती है।
हृदय ट्यूमर का उपचार
उपचार ट्यूमर के प्रकार, आकार, स्थान और रोगी की स्थिति पर आधारित होता है।
1. शल्यचिकित्सा द्वारा ट्यूमर निकालना (सर्जिकल एक्सीशन)
यह अधिकांश ट्यूमर का मुख्य और सबसे प्रभावी उपचार है।
मिक्सोमा जैसे बिनाइन (गैर-कैंसर) ट्यूमर को पूरी तरह निकाल देने पर रोगी अक्सर पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है और पुनरावृत्ति की संभावना बहुत कम होती है।
2. मैलीग्नेंट (कैंसर) ट्यूमर का इलाज
आवश्यकता अनुसार संयुक्त उपचार दिया जाता है—
- शल्यचिकित्सा
- कीमोथेरेपी
- रेडियोथेरेपी
जल्दी पहचान और प्रारंभिक उपचार से परिणाम बेहतर मिलते हैं।
3. हृदय प्रत्यारोपण (हार्ट ट्रांसप्लांट)
बहुत दुर्लभ परिस्थितियों में, जब ट्यूमर हृदय के महत्वपूर्ण हिस्सों को व्यापक रूप से प्रभावित कर देता है, हृदय प्रत्यारोपण पर विचार किया जा सकता है।
अंत में संक्षेप:
हृदय ट्यूमर दुर्लभ होते हैं, परंतु समय पर पहचान और उपचार अत्यंत आवश्यक है।
अधिकांश बिनाइन (गैर-कैंसर) ट्यूमर का शल्यचिकित्सा द्वारा पूर्ण उपचार संभव है।
मैलीग्नेंट (कैंसर) ट्यूमर के लिए बहु-विध उपचार की आवश्यकता होती है।
समय पर जाँच, इमेजिंग और विशेषज्ञ देखभाल से परिणाम काफी बेहतर होते हैं और जटिलताओं की संभावना कम होती है।
MBBS, MS, MCh, FRCS-CTh,
FRCS-CTh(Ed), MEBCTS, FEBCTS, FACS(USA), DNB, MNAMS, MBA
Senior Consultant – Cardiothoracic & Vascular Surgery
National Heart Institute, New Delhi
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