एसाइनॉटिक जन्मजात हृदय रोग (Acyanotic Heart Disease)
एसाइनॉटिक हार्ट डिज़ीज़ क्या है?
एसाइनॉटिक हृदय रोग ऐसे जन्मजात (जन्म से मौजूद) हृदय-दोष होते हैं जिनमें हृदय की संरचना में किसी गड़बड़ी के कारण फेफड़ों में रक्त का प्रवाह आवश्यकता से अधिक हो जाता है, या हृदय से बाहर जाने वाले रक्त के मार्ग में किसी प्रकार की रुकावट बन जाती है।
इन स्थितियों में:
ऑक्सीजन-युक्त (स्वच्छ) और ऑक्सीजन-रहित (फीका) रक्त का अधिक मिश्रण नहीं होता,
इसलिए रोगी में नीलापन (सायनोसिस) दिखाई नहीं देता।
रक्त में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य या लगभग सामान्य बना रहता है।
संक्षेप में, एसाइनॉटिक हृदय रोग वे दोष हैं जो रक्त प्रवाह की दिशा या मात्रा को प्रभावित करते हैं, लेकिन रक्त की ऑक्सीजन-मात्रा को कम नहीं करते।
इनका पता अक्सर शैशव या बचपन में लग जाता है, परंतु हल्के मामलों में यह बड़े होने पर भी पता चल सकता है।
एसाइनॉटिक हृदय रोग कितने प्रकार के होते हैं?
एसाइनॉटिक जन्मजात हृदय रोग दो मुख्य समूहों में विभाजित होते हैं:
A) लेफ़्ट-टू-राइट शंट वाले रोग
(स्मान्यतः इनको ‘हार्ट में छिद्र’ के नाम से जाना जाता है)
इस स्थिति में हृदय के बाएँ भाग (जिसमें ऑक्सीजन-युक्त रक्त होता है) और दाएँ भाग (जिसमें ऑक्सीजन-रहित रक्त होता है) के बीच एक असामान्य मार्ग/छेद बन जाता है। इसके कारण: रक्त उच्च दाब वाले बाएँ हिस्से से निम्न दाब वाले दाएँ हिस्से की ओर बहता है और फेफड़ों में रक्त का अत्यधिक प्रवाह होने लगता है।
आम लेफ़्ट-टू-राइट शंट वाले रोग
एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) – हृदय के ऊपरी कक्षों (एट्रिया/आलिंद) के बीच छेद
वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) – हृदय के निचले कक्षों (वेंट्रिकिल/निलय) के बीच छेद
पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (PDA) – हृदय से निकलने वाली दो मुख्य रक्त-नलिकाओं के बीच जन्म के बाद भी बनी रहने वाली नलिका
B) ऑब्स्ट्रक्टिव लीशंस (रुकावट पैदा करने वाले रोग)
इन रोगों में हृदय से निकलने वाले रक्त-मार्ग में या हृदय-वाल्व में सिकुड़न (narrowing) हो जाता है, जिसके कारण हृदय को रक्त पंप करने में कठिनाई होती है।
आम ऑब्स्ट्रक्टिव लीशंस (रुकावट पैदा करने वाले रोग)
पल्मोनरी स्टेनोसिस – पल्मोनरी वाल्व संकरा हो जाता है, जिससे फेफड़ों की ओर रक्त प्रवाह कम हो जाता है।
एओर्टिक स्टेनोसिस – एओर्टिक वाल्व संकरा होकर शरीर तक जाने वाले रक्त प्रवाह को बाधित करता है।
कोआर्कटेशन ऑफ एओर्टा – एओर्टा का एक भाग संकरा हो जाता है, जिससे संकरे भाग के पहले रक्त-दाब बढ़ जाता है और उसके आगे रक्त प्रवाह कम हो जाता है।
एसाइनॉटिक जन्मजात हृदय रोग के सामान्य लक्षण
(हमारे YouTube चैनल पर उपलब्ध संबंधित वीडियो भी अवश्य देखें: https://youtu.be/pEQmqVd7RX4?si=8sU2s_5FcmpMwf1O)
प्रायः दिखाई देने वाले लक्षण:
बार-बार छाती का संक्रमण — खाँसी, सर्दी, निमोनिया
बार-बार श्वसन संक्रमण (रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन)
दूध पीते समय कठिनाई / थकावट
स्तनपान करते समय पसीना आना
तेज साँस चलना या साँस फूलना
बच्चे की तेज धड़कन महसूस होना
वजन अपेक्षा के अनुसार न बढ़ना
खेलते समय जल्दी थक जाना
डॉक्टर द्वारा सुनी जाने वाली हृदय-ध्वनि (मर्मर)
त्वचा/होंठों पर नीलापन नहीं दिखता (क्योंकि रक्त में ऑक्सीजन सामान्य होती है)
एसाइनॉटिक हृदय रोग कैसे पहचाने जाते हैं?
विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा विस्तृत जाँच और निम्नलिखित परीक्षणों की सहायता से रोग का निदान किया जाता है:
छाती का एक्स-रे
ईसीजी (ECG)
ईकोकार्डियोग्राफी (ECHO) – सबसे महत्वपूर्ण और आम जाँच
सीटी / एमआरआई (कुछ विशेष परिस्थितियों में)
कार्डियक कैथेटराइजेशन (चयनित मामलों में)
एसाइनॉटिक जन्मजात हृदय रोग का उपचार कैसे किया जाता है?
उपचार 3 मुख्य प्रकारों में आता है:
1) औषधियाँ (Medications)
औषधियों का उद्देश्य है:
लक्षणों पर नियंत्रण
बच्चे को ऑपरेशन/कैथेटर-प्रक्रिया के लिये तैयार करना
प्रक्रिया के बाद देखभाल
केवल दवाओं से यह रोग पूरी तरह ठीक नहीं होता।
2) कैथेटर-आधारित उपचार
यह बिना छाती खोले किया जाने वाला उपचार है, जिसमें:
जाँघ की रक्त-नलिका से विशेष तारें और उपकरण हृदय तक पहुँचाए जाते हैं
ASD, VSD, PDA जैसे छेद विशेष डिवाइस की सहायता से बंद किए जाते हैं
कुछ बच्चों में यह तरीका बहुत कारगर और प्राथमिक विकल्प होता है
कुछ बच्चों में हृदय-की संरचना के कारण यह उपयुक्त नहीं होता
यह प्रकिया उपयुक्त है या नहीं इसका का निर्णय विशेषज्ञ हृदय रोग विशेषज्ञ ईको और अन्य परीक्षणों के आधार पर करते हैं।
3) शल्य-चिकित्सा (Open-Heart Surgery)
निम्न परिस्थितियों में शल्य-चिकित्सा आवश्यक होती है:
बड़े छेद
जटिल दोष
विलंबित उपचार
बड़े VSD
जटिल ASD
गंभीर वाल्व-संकरीकरण
कोआर्कटेशन जिसमें बलूनिंग संभव न हो
अन्य जटिल संरचनात्मक विकार
ऐस सभी विकार जिनक उपचार कैथिटर-आधारित उपचार से संभव नहीं है
कौन-सा बच्चा शल्य-चिकित्सा के लिए उपयुक्त है, यह निर्णय विशेषज्ञ द्वारा विस्तृत जाँच के बाद ही लिया जाता है।
नियमित फॉलो-अप क्यों आवश्यक है?
खासकर इन परिस्थितियों में:
यदि डॉक्टर ने बताया है कि “छेद अभी उपचार योग्य नहीं” या “अपने-आप बंद होने की सम्भावना है”
यदि रोग का निदान (डायग्नोसिस) स्पष्ट नहीं है
यदि बच्चे का पहले ऑपरेशन/इंटरवेंशन हो चुका है
यदि एसाइनॉटिक हृदय रोग का उपचार न किया जाए तो क्या होता है?
बिना उपचार के यह रोग गंभीर रूप ले सकता है:
फेफड़ों के दाब में वृद्धि (पल्मोनरी हाइपरटेंशन)
हृदय का आकार बढ़ना
हृदय-वाल्व में रिसाव
हृदय-विफलता (हार्ट फेलियर)
अनियमित धड़कनें (एरिथमिया)
शारीरिक विकास में कमी
बार-बार छाती का संक्रमण
आइज़ेनमेंगर सिंड्रोम – अत्यधिक देरी होने पर रोग लाइलाज (incurable) हो जाता है
समय पर उपचार से लगभग सभी जटिलताओं को रोका जा सकता है।
उपचार के दीर्घकालिक परिणाम (Prognosis)
यदि समय पर उपचार हो जाए, तो:
अधिकांश बच्चे सामान्य जीवन जीते हैं
पढ़ाई-लिखाई, खेल-कूद सब सामान्य रूप से करते हैं
आयु सामान्य के बराबर होती है
कई बच्चों को लंबे समय तक कोई दवा नहीं लेनी पड़ती
उपचार के बाद वयस्क होने पर भी जीवन पूरी तरह सामान्य रहता है
अभिभावकों और परिवार के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
कुछ छोटे छेद अपने-आप बंद हो सकते हैं।
बड़े छेद स्वतः बंद नहीं होते और उपचार आवश्यक है।
लगभग सभी एसाइनॉटिक हृदय रोग पूरी तरह उपचार योग्य हैं।
उपचार में देरी होने पर फेफड़ों का दाब, धड़कनें और हृदय-संबंधी जटिलताएँ बढ़ सकती हैं।
बच्चे की खुराक, वजन, और विकास पर ध्यान देना आवश्यक है।
ऑपरेशन/इंटरवेंशन के बाद बच्चे बहुत जल्दी सामान्य हो जाते हैं।
क्या एसाइनॉटिक हृदय रोग को रोका जा सकता है?
पूरी तरह से रोके नहीं परंतु जोखिम कुछ हद तक कम किए जा सकते हैं, इस प्रकार से,
पौष्टिक मातृ आहार
गर्भावस्था में शराब-धूम्रपान से परहेज़
गर्भावस्था में अनावश्यक दवाओं से बचाव
गर्भावस्था में मधुमेह नियंत्रण
गर्भधारण से पहले और दौरान फोलिक ऐसिड
गर्भावस्था की नियमित जाँच
गर्भधारण से पूर्व रुबेला टीकाकरण
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि बच्चे में निम्न लक्षण दिखें:
बहुत तेज साँस चलना
दूध पीने में कठिनाई / मना करना
अत्यधिक पसीना
वजन न बढ़ना
बार-बार छाती का संक्रमण
थकावट या बेहोशी
बहुत तेज या असामान्य हृदय-मर्मर
MBBS, MS, MCh, FRCS-CTh,
FRCS-CTh(Ed), MEBCTS, FEBCTS, FACS(USA), DNB, MNAMS, MBA
Associate Director-Cardio-thoracic and Vascular Surgery, Yashoda Medicity, Ghaziabad(UP)
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या हर बार ऑपरेशन की आवश्यकता होती है?
नहीं।
- कई छोटे छेद अपने-आप ठीक हो जाते हैं।
- कई दोषकैथेटर-प्रक्रिया से बिना ऑपरेशन ठीक हो जाते हैं।
- लेकिन यदि ऑपरेशन की सलाहन दी गई हो, तब भी नियमित फॉलो-अप बहुत आवश्यक है।
क्या मेरा बच्चा सामान्य जीवन जी पाएगा?
हाँ।
समुचित उपचार के बाद बच्चे सामान्य जीवन, सामान्य गतिविधियों और सामान्य आयु की ओर बढ़ते हैं।
क्या लंबे समय तक दवा लेनी पड़ती है?
आमतौर पर नहीं।
दवाएँ केवल कुछ समय तक ही आवश्यक रहती हैं।
क्या गर्भावस्था के दौरान इन दोषों का पता चल सकता है?
हाँ।
अधिकांश जन्मजात हृदय दोषों का पता फीटल ईको (18–22 सप्ताह) से लगाया जा सकता है।
क्या यह रोग वंशानुगत होता है?
अधिकतर मामले स्वतः होते हैं।
यदि परिवार में कई जन्मजात हृदय रोग हों, तो जैविक परामर्श (genetic counselling) की सलाह दी जाती है।
डॉक्टर ने कहा कि “छेद अपने-आप बंद हो जाएगा”, फिर भी फॉलो-अप क्यों ज़रूरी है?
क्योंकि:
कई बार छेदलंबे समय तक बंद नहीं होता
कभी-कभी छेदआंशिक रूप से बंद होकर नई समस्या बना देता है
कुछ बच्चों में VSD बंद होते समय पास केएओर्टिक वाल्व को खींच लेता है और वहाँ लीकेज शुरू हो सकती है (यह अधिक गंभीर समस्या है)
डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि छेद
वास्तव में बंद हुआ है,
पूरी तरह बंद हुआ है,
किसी नयी समस्या का कारण नहीं बना
क्या मेरे बच्चे को भविष्य में दोबारा ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ेगी?
– सामान्यतः नहीं।
अधिकांश मामलों में एक ही ऑपरेशन या एक कैथेटर-आधारित प्रक्रिया उपचार के लिए पर्याप्त होती है, और बच्चे आगे चलकर बिल्कुल सामान्य व सक्रिय जीवन जीते हैं।
हालाँकि, कुछ बच्चों को उम्र बढ़ने के साथ आगे चलकर अतिरिक्त प्रक्रियाओं की आवश्यकता पड़ सकती है। यह कुछ बातों पर निर्भर करता है:
- जन्मजात हृदय रोग का प्रकार
- दोष की जटिलता
- पहला उपचार किस उम्र में किया गया
- बढ़ते हुए शरीर के साथ हृदय और हृदय-वाल्व में किस प्रकार के परिवर्तन आते हैं
नियमित फॉलो-अप अत्यंत आवश्यक है।
एक जन्मजात हृदय रोग विशेषज्ञ के नियमित मूल्यांकन से भविष्य में किसी अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता होने पर उसे समय रहते पहचानना और उचित ढंग से प्रबंधित करना संभव हो जाता है।
इस विषय पर किसी भी प्रश्न के लिए यहां लिखें
Mail to: drkeshriheartcare@gmail.com or Click Here For WhatsApp (Text msg Only):