एओर्टिक डिसेक्शन (Aortic Dissection)

एओर्टिक डिसेक्शन क्या है?

एओर्टिक डिसेक्शन हृदय से निकलने वाली शरीर की सबसे बड़ी धमनी (आर्टरी) एओर्टा में होने वाला एक अत्यन्त गम्भीर समस्या है। इसमें एओर्टा की अन्दरूनी परत (इनर लेयर) में छोटी सी दरार या आंशिक छेद हो जाता है। इस आंशिक छेद के कारण रक्त एओर्टा की दीवार के भीतर प्रवेश कर जाता है और उसकी परतों को एक-दूसरे से अलग कर देता है। जैसे-जैसे रक्त इस “कृत्रिम मार्ग” में बहता रहता है, दरार और बढ़ सकती है और धमनी फटकर प्राणघातक रक्तस्राव का कारण बन सकती है।

इस स्थिति में त्वरित पहचान और आपातकालीन उपचार अत्यन्त आवश्यक है।

एओर्टिक डिसेक्शन के प्रकार

एओर्टिक डिसेक्शन को उसके उत्पत्ति के स्थान (location) के आधार पर दो प्रकारों में बाँटा जाता है:

  1. टाइप A डिसेक्शन

    • एओर्टा के हृदय से निकलते ही प्रारंभिक भाग को प्रभावित करता है (जिसे हम असेंडिंग एयोर्टा कहते हैं)

    • यह एयोर्टा  के आगे हिस्सों – एयोर्टिक आर्च और डिसेंडिंग एयोर्टा तक फैल सकता है।

    • यह डिसेक्शन का सबसे खतरनाक प्रकार है — इसके उपचार के लिए तत्काल त्वरित ओपन-हार्ट सर्जरी की आवश्यकता होती है।

  1. टाइप B डिसेक्शन

    • केवल एयोर्टा  के निचले भाग को – जिसे हम डिसेंडिंग एयोर्टा कहते हैं – प्रभावित करता है।

    • अधिकांश मामलों में दवा द्वारा रक्त-चाप के नियंत्रण से इसका उपचार किया जाता है।

    • जटिलताएँ होने पर इसके उपचार के लिए स्टेंट या सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

एओर्टिक डिसेक्शन के कारण और जोखिम बढ़ाने वाले कारक

  • उच्च रक्तचाप (Hypertension) — सबसे आम कारण

  • एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों का सख्त होना)

  • कनेक्टिव टिश्यू विकार — जैसे मार्फ़न सिंड्रोम, एहलार डैनलॉस सिंड्रोम

  • गंभीर चोट या दुर्घटना

  • एओर्टिक एन्यूरिज्म (Aortic Aneurysm)

  • जन्मजात हृदय दोष — जैसे बाई-कस्पीड एयोर्टिक वाल्व, कोआर्कटेशन

  • नशे का सेवन — विशेष रूप से कोकीन/एम्फेटामाइन, जो रक्त-दाब अचानक बढ़ाते हैं

एओर्टिक डिसेक्शन के लक्षण

लक्षण अचानक शुरू होते हैं और कई बार हार्ट अटैक जैसे लगते हैं:

  • सीने, पीठ या पेट में तीखा, चीरने-जैसा या फटने-जैसा दर्द

  • जिसका रोगी अपने जीवन का सबसे भयंकर दर्द के रूप में वर्णन करते हैं

  • साँस लेने में कठिनाई

  • शरीर के एक ओर कमजोरी या पक्षाघात (लकवा) जैसा महसूस होना

  • बेहोशी या भ्रम

  • दोनों बाहों के रक्त-छाप में अंतर

  • पसीना, घबराहट, जी मिचलाना, तेज धड़कन

किसी भी अचानक शुरू हुए छाती या पीठ के दर्द को एओर्टिक डिसेक्शन मानकर ही जाँच करवानी चाहिए।

एओर्टिक डिसेक्शन की जाँच

जीवन बचाने के लिए तात्कालिक जाँच आवश्यक है:

  • सी.टी.  एन्जियोग्राफी (CTA) — सबसे विश्वसनीय जाँच

  • ट्रांस एसोफैजियल इकोकार्डियोग्राफी (TEE) — अस्थिर मरीजों में तुरन्त उपयोगी

  • MRI — विस्तृत जानकारी देता है, पर आपातकाल में कम उपयोगी

  • चेस्ट X-Ray — कम विश्वसनीय

आपातकालीन उपचार (Emergency Treatment)

  1. तात्कालिक स्थिरीकरण (Stabilization)

    • रक्त-चाप और हृदय की धड़कन को शीघ्र नियंत्रित करना

    • बीटा-ब्लॉकर्स जैसी दवाएँ देना

    • आवश्यकता अनुसार ऑक्सीजन, द्रव और अन्य सहायक उपचार

  1. सर्जरी (Surgical Repair)

    • टाइप A डिसेक्शन:

      – टाइप ए डिसेक्शन के उपचार के लिए तात्कालिक आपातकालीन ओपन-हार्ट सर्जरी आवश्यक होती है

      – फटी हुई एओर्टा को हटाकर कृत्रिम ग्राफ्ट लगाया जाता है।

    • टाइप B डिसेक्शन:

      – सामान्यतः दवाओं से इस समस्या का नियंत्रण किया जाता है।

      – जटिलता होने पर स्टेंट-ग्राफ्ट (TEVAR) या सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।

  1. गहन चिकित्सा (ICU Monitoring)

    • रक्त-चाप का नियंत्रण

    • अंगों के रक्त-प्रवाह की जाँच

    • दोबारा डिसेक्शन से बचाव

    • दवाओं से दीर्घकालीन उपचार

संभावित जटिलताएँ

उपचार में देरी होने पर निम्न जटिलताएँ हो सकती हैं:

  • एओर्टा का फटना (Rupture)

  • अंगों को रक्त-प्रवाह कम होना

  • स्ट्रोक या लकवा

  • हृदय के चारों ओर रक्त भरना (Cardiac Tamponade)

  • मृत्यु

उपचार के बाद भी जीवनभर निगरानी आवश्यक है।

एओर्टिक डिसेक्शन की रोकथाम

  • नियमित रूप से रक्त-चाप का नियंत्रण

  • धूम्रपान से परहेज़

  • कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण

  • पारिवारिक इतिहास होने पर नियमित जाँच

  • मार्फ़ान सिंड्रोम के जैसे रोगों वाले लोगों में नियमित इमेजिंग

  • जोखिम होने पर कठोर व्यायाम से बचाव

रोगियों और परिजनों के लिए सरल मार्गदर्शन (Parent–Patient Guidance)

  • छाती/पीठ में अचानक शुरू हुए किसी भी दर्द की उपेक्षाना करें, हल्के में न लें

  • उच्च रक्त-दाब होने पर दवा नियमित रूप से लें

  • यदि डॉक्टर ने फॉलो-अप CTA/MRI बताया है तो समय पर अवश्य करवाएँ

  • भारी वजन उठाने से बचें

  • तनाव, नशे और अत्यधिक exertion से बचाव करें

  • परिवार में किसी को connective tissue disorder हो तो समय-समय पर जाँच करवाएँ

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

एओर्टिक डिसेक्शन क्या होता है?

एओर्टिक डिसेक्शन तब होता है जब एओर्टा की भीतरी परत में दरार पड़ जाती  है और रक्त उसकी परतों के बीच प्रवेश कर जाता है। यह स्थिति अत्यन्त जानलेवा होती है और त्वरित उपचार आवश्यक है।

नहीं।
एन्यूरिज्म एओर्टा की सूजन/फूलाव है,
जबकि डिसेक्शन एओर्टा में दरार अथवा आंशिक छिद्र है।
कई बार एन्यूरिज्म आगे चलकर डिसेक्शन का कारण बन सकता है।

हाँ। यह हृदय-धमनियों की सबसे गम्भीर आपात स्थितियों में से एक है। समय पर पहचान और उपचार से ही जीवन बचता है।

हाँ।
यह हृदय-धमनियों की सबसे गंभीर आपात स्थितियों में से एक है।
टाइप A के लिए तुरंत सर्जरी, और टाइप B के लिए शीघ्र चिकित्सा देखभाल आवश्यक है।

बिल्कुल। यही कारण है कि अचानक सीने/पीठ का कोई भी दर्द तुरन्त जाँच करवाने का संकेत है।

सबसे बड़ा कारण है अनियंत्रित उच्च रक्त-चाप।
अन्य कारण: मार्फ़न/एहलेर-डैनलॉस सिंड्रोम, चोट, नशीले पदार्थ, जन्मजात हृदय रोग, और  एन्यूरिज्म।

अचानक “फटने जैसा” सीने/पीठ का दर्द

दर्द का पेट/कमर तक फैलना

बेहोशी या उलझन

हाथ-पैर में कमजोरी

दोनों बाँहों के रक्त-दाब में अंतर

अचानक पसीना, मिचली, या साँस फूलना

कभी-कभी हाँ।
कुछ मरीज बेहोशी, कम दबाव या स्ट्रोक जैसे लक्षणों के साथ आते हैं।

अपर का अनुभाग देखें

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नहीं और हाँ, यह डिज़ेक्शन के प्रकार पर निर्भर करता है.

टाइप A डिसेक्शन: लगभग हमेशा सर्जरी आवश्यक।

टाइप B डिसेक्शन: यदि जटिलता न हो तो दवाओं से नियंत्रण, अन्यथा स्टेंट या सर्जरी।

यदि जोखिम बढ़ाने वाले कारकों को नियंत्रित न किया जाए तो दोबारा होने की सम्भावना रहती है।
इसलिए जीवनभर नियमित फॉलो-अप बहुत आवश्यक है।

हाँ, अधिकतर मरीज उपचार के बाद सामान्य जीवन जीते हैं —

बशर्ते वे:     रक्त-दाब को नियंत्रित रखें

स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ

नियमित जाँच करवाएँ

उच्च रक्त-दाब वाले रोगी

मार्फ़न / एहलर – डैनलॉस जैसे कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर वाले रोगी

एओर्टिक एन्यूरिज्म वाले रोगी

परिवार में एओर्टिक रोग का इतिहास

भारी व्यायाम/वजन उठाने वाले

पूरी तरह नहीं, पर जोखिम घटाया जा सकता है:

रक्त-दाब नियंत्रण

धूम्रपान से बचाव

स्वस्थ जीवनशैली

ज्ञात  एन्यूरिज्म की नियमित जाँच

अधिकतर मरीजों को जीवनभर रक्त-दाब नियंत्रित करने वाली दवाएँ लेनी पड़ती हैं।
अन्य दवाएँ रोग की स्थिति के अनुसार दी जाती हैं।

यदि रोगी में ये लक्षण हों तो तुरन्त अस्पताल ले जाएँ:

अचानक सीने/पीठ में दर्द

साँस फूलना

बेहोशी

हाथ-पैर में कमजोरी

बहुत अधिक रक्त-दाब

कोई भी नया या बिगड़ता हुआ लक्षण

समय पर उपचार और नियंत्रण के साथ:

परिणाम बहुत अच्छे होते हैं

अधिकांश लोग सामान्य जीवन जीते हैं

नियमित स्कैन से भविष्य की समस्याएँ जल्दी पकड़ में आ जाती हैं

कुछ जटिल मामलों में जीवन में कई सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। डॉक्टर से विस्तृत जानकारी लेना आवश्यक है।

हाँ, कई परिस्थितियों में परिवार के सदस्यों की जाँच कराना आवश्यक होता है।
यदि आपका एओर्टिक डिसेक्शन आनुवंशिक कारणों या कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर (जैसे मार्फ़ान सिंड्रोम, एलर्स–डैनलोस सिंड्रोम, लोईज़–डिट्ज़ सिंड्रोम) से संबंधित है, या परिवार में किसी को पहले एओर्टिक  एन्यूरिज्म/डिसेक्शन हुआ है, तो पहली पीढ़ी के परिजनों (माता–पिता, भाई–बहन, बच्चे) की जाँच अवश्य करानी चाहिए।

जाँच में सामान्यतः शामिल होते हैं:

इकोकार्डियोग्राफी (ECHO)

आवश्यकता पड़ने पर सीटी या एमआरआई

चयनित मामलों में जेनेटिक परीक्षण

समय रहते एओर्टा की कमज़ोरी या फैलाव का पता चलने पर भविष्य में होने वाले खतरों से बचाव संभव होता है।

इस विषय पर किसी भी प्रश्न के लिए यहां लिखें

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