जटिल जन्मजात हृदय रोग – कॉम्पलेक्स कंजेनाइटल हार्ट डिजीस)

जटिल जन्मजात हृदय रोग हृदय की उन गंभीर संरचनात्मक विकृतियों के समूह को कहा जाता है जो जन्म से ही हृदय में उपस्थित होती हैं। ये स्थितियाँ अनेक प्रकार के दोषों से जुड़ी होती हैं—जो हृदय के कक्षों (चैंबर्स), कपाटों (वॉल्व), धमनियों (आर्टरी) अथवा शिराओं (वेन्स) को प्रभावित करती हैं—और रक्त के प्रवाह, शरीर तक ऑक्सीजन के पहुँचने तथा हृदय के कार्य करने के तरीके को महत्वपूर्ण रूप से बदल देती हैं।

अपनी अत्यधिक जटिलता के कारण, इन दोषों के लिए प्रायः उन्नत शल्यक्रिया, चरणबद्ध प्रक्रियाएँ (विभिन्न अंतरालों पर एक के बाद एक की जाने वाली अनेक शल्यक्रियाएँ), और आजीवन हृदय संबंधी अनुवर्ती देखभाल की आवश्यकता होती है। आधुनिक नवजात शिशु चिकित्सा और बाल-हृदय शल्यक्रिया में विकास के कारण जीवन-रक्षा तथा दीर्घकालिक परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

जटिल जन्मजात हृदय रोग के सामान्य प्रकार

  1. सिंगल वेंट्रिकल फिजियोलॉजी (Single Ventricle Physiology)
    इन दोषों में हृदय का केवल एक आधा भाग ही ठीक से विकसित होता है और दूसरा आधा अविकसित रह जाता है। केवल एक निलय (वेंट्रिकल) प्रभावी रूप से कार्य करता है और ऑक्सीजन-समृद्ध तथा ऑक्सीजन-विहीन रक्त का मिश्रण होता है।

    उदाहरण: हाइपोप्लास्टिक लेफ़्ट हार्ट सिंड्रोम (HLHS), ट्राइकस्पिड एट्रेशिया।

  2. ट्रांस्पोजिशन ऑफ़ ग्रेट वेसल्स (Transposition of the Great Arteries – TGA)
    इस अवस्था में हृदय की मुख्य रक्तवाहिनियाँ आपस में बदल जाती हैं। महाधमनी (एयोर्टा) —जिसे बाएँ निलय (लेफ्ट वेंट्रिकल) से ऑक्सीजन-समृद्ध रक्त को शरीर तक ले जाना चाहिए—दाएँ निलय (राइट वेंट्रिकल) से निकलती है। इसी प्रकार फुफ्फुसीय धमनी (पल्मोनरी आर्टरी) —जिसे दाएँ निलय (राइट वेंट्रिकल) से ऑक्सीजन-विहीन रक्त को फेफड़ों तक ले जाना चाहिए—बाएँ निलय (लेफ्ट वेंट्रिकल) से निकलती है। इस उलटी व्यवस्था के कारण शिशु के शरीर को बहुत कम ऑक्सीजन मिलती है, जिससे ऑक्सीजन की गंभीर कमी हो जाती है। यह अवस्था जीवन-घातक है और शिशु के जीवित रहने व सामान्य विकास के लिए शीघ्र शल्यक्रिया (ओपन हार्ट सर्जरी) आवश्यक होती है।

  3. टेट्रालॉजी ऑफ़ फैलो & पल्मोनरी एट्रेसिया
    यह टेट्रालॉजी ऑफ़ फैलो का गंभीर रूप है (सायनोटिक हृदय रोग अनुभाग देखें) जिसमें पल्मोनरी वाल्व पूर्णतः अवरुद्ध होता है (जो टीओएफ में संकीर्ण किंतु खुला रहता है). इस अवरोध के कारण रक्त फेफड़ों तक नहीं पहुँच पाता।

  4. डबल आउटलेट राइट वेंट्रिकल (DORV)
    इस अवस्था में दोनों मुख्य धमनियाँ—महाधमनी और फुफ्फुसीय धमनी (एयोर्टा एवं पल्मोनरी आर्टरी) —दाएँ निलय (राइट वेंट्रिकल) से निकलती हैं, जिससे असामान्य रक्तसंचार और ऑक्सीजन-मिश्रण होता है।

  5. टोटल एनोमलस पल्मोनरी वेनस रिटर्न (TAPVR)
    इस अवस्था में फेफड़ों से आने वाला ऑक्सीजन-समृद्ध रक्त हृदय के बाईं ओर जाने के बजाय हृदय के दाईं ओर बहता है।

  6. ट्रंकस आर्टेरियोसस
    इस स्थिति में महाधमनी और फुफ्फुसीय धमनी (ऐयोर्टा एवं पल्मोनरी आर्टरी) अलग-अलग न होकर हृदय से एक ही बड़ी रक्तवाहिका के रूप में निकलती है, जो फेफड़ों और पूरे शरीर दोनों को रक्त पहुँचाती है।

  7. कम्पलीट AV कैनाल डिफेक्ट (AVSD)
    इस अवस्था में एक बड़ा केंद्रीय छिद्र होता है जो दोनों सेप्टम तथा दोनों कक्षों के बीच स्थित कपाटों को प्रभावित करता है।

लक्षण

अधिकतर लक्षण जन्म के तुरंत बाद दिखाई देते हैं और तेज़ी से बढ़ सकते हैं:

  • त्वचा, होंठ या नाखूनों का नीला पड़ना (सायनोसिस)

  • तेज़ या कठिन श्वसन

  • दूध पीने में कमी

  • वज़न का पर्याप्त न बढ़ना

  • अत्यधिक नींद या थकान

  • पैरों, पेट या आँखों के आसपास सूजन

  • परीक्षण में असामान्य हृदय ध्वनि

गंभीर स्थितियों में शिशु को त्वरित गहन चिकित्सा और आपातकालीन हृदय-देखभाल की आवश्यकता हो सकती है

निदान / डायग्नोसिस

सही समय पर किया गया सटीक डायग्नोसिस अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सामान्य जाँचें:

  • भ्रूण की इकोकार्डियोग्राफी (गर्भावस्था के दौरान)

  • जन्म के बाद इकोकार्डियोग्राम

  • ईसीजी

  • छाती का एक्स-रे

  • कार्डिएक सीटी/एमआरआई

  • हृदय कैथेटरीकरण

उपचार एवं प्रबंधन

  1. औषधियाँ
    इनका उद्देश्य हार्ट फेलियर के लक्षणों को नियंत्रित करना, श्वसन में सुधार करना, आवश्यकता पड़ने पर डक्टस आर्टेरियोसस को खुला बनाए रखना तथा शिशु को शल्यक्रिया के लिए तैयार करना होता है।केवल औषधियाँ इन जटिल रोगों के उपचार के लिए अकेले पर्याप्त नहीं हैं।

  2. कैथेटर आधारित प्रक्रियाएँ
    बलून डाइलेटेशन, स्टेंटिंग या अन्य अस्थायी प्रक्रियाएँ शिशु को संशोधक शल्यक्रिया तक स्थिर रखने के लिए की जाती हैं।ये प्रक्रियाएँ इन जटिल रोगों के उपचार के लिए अकेले पर्याप्त नहीं हैं।

  3. शल्यक्रिया
    अधिकांश जटिल जन्मजात हृदय रोग में चरणबद्ध तरीके से कई सुधारात्मक शल्यक्रिया (करेक्टिव ओपन हार्ट सर्जरी) आवश्यक होती है, जैसे:

    • नॉरवुड, ग्लेन, फॉन्टन प्रक्रियाएँ (सिंगल वेंट्रिकल स्थितियों में)

    • आर्टेरियल स्विच ऑपरेशन (ट्रांस्पोजिशन ऑफ़ ग्रेट आर्टरीज में)

    • दोष के प्रकार के अनुसार अन्य करेक्टिव ओपन हार्ट सर्जरी

  4. हृदय प्रत्यारोपण / हार्ट ट्रांसप्लांटेशन
    उन स्थितियों में किया जाता है जहाँ हृदय की मरम्मत पर्याप्त रूप से सम्भव न हो।

ओपन हार्ट सर्जरी के पश्चात देखभाल में पोषण-सहायता, विकास-निगरानी, संक्रमण-निरोध तथा परिवारों के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श सम्मिलित होता है।

दीर्घकालिक देखभाल

जटिल जन्मजात हृदय रोग वाले बच्चों को आजीवन जन्मजात हृदय विशेषज्ञ की देखभाल की आवश्यकता होती है।

  • नियमित जाँच से निम्न समस्याओं का शीघ्र पता चलता है:

  • एरिथमिया

  • वाल्व में लीकेज

  • रक्तवाहिनियों (आर्टरी) में सिकुड़न

  • हार्ट फेलियर

उपयुक्त उपचार और निगरानी से अनेक बच्चे स्वस्थ एवं उत्पादक वयस्क बनते हैं।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या जटिल जन्मजात हृदय रोग जन्म से पहले पता चल सकती है?

हाँ। भ्रूण इकोकार्डियोग्राम (आमतौर पर गर्भावस्था के 18–22 सप्ताह में) अधिकांश बड़े हृदय दोषों का पता लगा सकता है।

अधिकांश मामलों में नहीं, पर कुछ आनुवंशिक सिंड्रोम या पारिवारिक इतिहास जोखिम बढ़ा सकते हैं।

हाँ, समय पर शल्यक्रिया और नियमित फॉलो अप देखभाल से कई बच्चे अच्छा करते हैं।
उनकी अवस्था के अनुसार कुछ गतिविधियों में सीमाएँ हो सकती हैं।

हाँ। कुछ अवस्थाओं में चरणबद्ध शल्यक्रियाएँ आवश्यक होती हैं और कुछ में बच्चे के बढ़ने के साथ नयी समस्याएँ उभरने पर पुनः शल्यक्रियाएँ करनी पड़ती हैं।
नियमित जाँचें इन्हें उचित समय पर योजना बनाने में मदद करती हैं।

नियमित फॉलोअप, समय पर टीकाकरण, कुछ संक्रमणों से सुरक्षा (यदि सलाह दी जाए), अच्छा पोषण और साँस फूलना या दूध कम पीना जैसे चेतावनी-संकेतों के प्रति सजगता।

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