मै एक वयस्क पुरुष/ महिला हूँ, वयस्कों में हृदय रोग के प्रारंभिक लक्षण क्या है जिसके लिए मुझे हृदय रोग विशेषज्ञ संपर्क करना चाहिए?

हृदय रोग के सामान्य लक्षणों होते हैं:

  • सांस फूलना (जो परिश्रम करने पर अधिक हो जाता है)

  • सीने में दर्द (जो परिश्रम करने पर अधिक हो जाता है)

  • पैरों में सूजन

  • धड़कन (हृदय के तेज़ धड़कने का अहसास)

  • अचेत होना / बेहोशी छाना / चक्कर आना

  • चलने / व्यायाम करने पर अत्यधिक थकान / पसीना आना

  • रात में खांसी

  • घुटन के कारण सपाट लेटने में असमर्थता

  • खांसी के साथ रक्त आन

उपरोक्त लक्षणों में से कोई भी लक्षण होने पर आपको हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

ऐसा कहा जाता है कि उपचार से बचाव बेहतर है और नियमित रूप से अपने चिकत्सक के सम्पर्क में रहना एक अच्छी आदत है। जहां तक हृदय रोगों का संबंध है, जिन लोगों में हृदय रोग के कोई लक्षण नहीं हैं और जिनकी उम्र 40-45 वर्ष से अधिक है, उन्हें भी हर दो साल में एक बार हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए, यदि उनमें निम्न में से कोई स्थिति हो

  • यदि उनके प्रथम श्रेणी के किसी रिश्तेदार (पिता, माता, भाई-बहन) को हृदय रोग हुआ हो।

  • उच्च रक्तचाप

  • मधुमेह

  • धूम्रपान/तंबाकू चबाना

  • उच्च कोलेस्ट्रॉल

  • लंबे समय से चली आ रही गुर्दे की बीमारी

  • तनावपूर्ण नौकरी / जीवन शैली

कुछ हृदय रोग प्रकृति में जन्मजात रूप से (जन्म से) हो सकते हैं। चिकित्सा और जाँच की विधियों में प्रगति के साथ, इनमें से कई बीमारियों की पहचान अब प्रसव पूर्व अवधि में ही या बच्चे के जन्म के तुरंत बाद की जा रही है। अंतर्निहित रोग के प्रकार और जटिलता के आधार पर जन्मजात रोग भिन्न-भिन्न आयु में और भिन्न-भिन्न लक्षणों के साथ से प्रकट हो सकते हैं।

मोटे तौर पर जन्मजात रोगों के दो मुख्य समूह होते हैं और उनके लक्षण एक दूसरे से भिन्न होते हैं।

जन्मजात हृदय रोगों के पहले समूह के सामान्य लक्षण हैं:

  • बार-बार श्वसन संक्रमण (छाती में संक्रमण/खांसी-जुकाम या बच्चे में निमोनिया)

  • बहुत तेज सांस लेना

  • सांस लेते समय पसली चलना

  • बच्चे की देखभाल करते समय माँ द्वारा बच्चे की हृदय गति बहुत तेज महसूस होना

  • बच्चे को स्तनपान कराने में कठिनाई (बच्चा स्तनपान करते-करते थक जाता है और भूख पूरी होने से पहले ही दूध पीना बंद कर देता है)

  • स्तनपान करते समय बच्चे के माथे पर पसीना आना

  • अत्यधिक रोना

  • बच्चे का वजन सामान्य रूप से नहीं बढ़ना

  • उम्र के अनुसार बच्चे की विकास में देरी होना

  • बच्चे की जांच करते समय आपके चिकित्सक द्वारा सुनाई देने वाली असामान्य हृदय स्पंदन (मर्मर)

जन्मजात हृदय रोगों के दूसरे समूह के सामान्य लक्षण हैं:

  • बच्चे की उँगलियों एवं होठों का नीला पड़ना

  • बच्चे का अचानक अत्यधिक नीला पड़ना -अत्यधिक रोना एवं सुस्त पड़ जाना (सायनोटिक स्पेल)

  • स्क्वाटिंग एपिसोड – कुछ शारीरिक गतिविधि के बाद बच्चा आराम करने के लिए रुक जाता है और अपने पैरों को अपनी छाती के साथ चिपका कर बैठ जाता है

  • अत्यधिक थकान

  • उँगलीयों के आख़िरी हिस्से में सूजन आना (क्लबिंग)

यदि किसी बच्चे में उपरोक्त लक्षणों में से कोई भी लक्षण हैं तो माता-पिता को हृदय रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

तकनीकी रूप से ओपन-हार्ट सर्जरी और बाईपास ऑपरेशन दो भिन्न प्रक्रियाएँ हैं। आम जनता की दृष्टि में वे सभी ऑपरेशन जिनमें छाती की हड्डी काटी जाती है, ओपन-हार्ट ऑपरेशन कहे जाते  हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।

एक ओपन-हार्ट ऑपरेशन वह शल्य क्रिया होती है जहां एक अत्याधुनिक मशीन (जिसे हार्ट-लंग मशीन कहा जाता है) की मदद से और विभिन्न दवाओं के संयोजन से हृदय स्पंदन को अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है एवं चीरे के द्वारा हृदय के प्रकोष्ठों को खोल कर आवश्यक शल्य प्रक्रियाओं को सम्पन्न किया जाता है। इस अवधि में हार्ट-लंग मशीन हृदय का कार्य करती है। प्रक्रिया समाप्त होने के पश्चात हृदय के चीरे को सिल कर उसका पुनः स्पंदन शुरू किया जाता है। इन प्रक्रियाओं में ‘हृदय में छेद’ का निवारण, जन्मजात हृदय रोगों का निवारण, हृदय के वाल्वों का प्रतिस्थापन या मरम्मत, हृदय के ट्यूमर का निवारण इत्यादि शामिल हैं।

दूसरी ओर बाईपास ऑपरेशन हृदय से संबंधित एक ऐसी शल्य क्रिया है जो हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिकाओं के अवरोध के लिए की जाती है (जिसे कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ कहा जाता है)। बाईपास ऑपरेशन के दौरान छाती से, पैर से या बांह से रक्त वाहिकाओं को निकाला जाता है और हृदय की रोगग्रस्त रक्त वाहिकाओं के साथ जोड़ा जाता है ताकि हृदय की रक्त आपूर्ति पुनर्स्थापित हो सके। आजकल शल्य क्रिया की तकनीकों में प्रगति के साथ, अधिकांश बाईपास ऑपरेशन हृदय गति को रोके बिना धड़कते हुए हृदय पर ही किए जाते हैं (बीटिंग हार्ट बाइपास)। अधिक जानकारी के लिए हमारे बाइपास ऑपरेशन अभिलेख को देखें।

हृदय की कुछ बीमारियों को केवल शल्य चिकित्सा द्वारा ही ठीक किया जा सकता है। इसमे शामिल है

  • अधिकांश जन्मजात हृदय रोग (जिसे आमतौर पर ‘दिल में छेद’ कहा जाता है)

  • हृदय वाल्व के लम्बे समय से चले आ रहे अधिकांश रोग जैसे गंभीर रिसाव या हृदय वाल्व का सिकुड़ना

  • हृदय की आपूर्ति करने वाली धमनियों में गम्भीर रुकावट (जिसे कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ कहा जाता है)

  • हृदय से उत्पन्न होने वाली महा-धमनी (एओर्टा) में दरार (जिसे एओर्टिक डिसेक्शन कहा जाता है)

  • हृदय की महा-धमनी (एओर्टा) में सूजन (जिसे एओर्टिक एन्यूरिस्म कहा जाता है)

  • दिल का दौरा पड़ने के बाद हृदय में होने वाले छिद्र (पोस्ट एम-आइ वी एस डी)

  • हृदय के आसपास की झिल्लियों का मोटा होना (कोंस्ट्रिक्टिव पेरिकार्डाइटिस)

  • हृदय और उसकी शिराओं में लगी बाहरी चोट

  • हृदय के अंदर गाँठ (ट्यूमर)

जब किसी को इनमें से कोई एक बीमारी होती है तो उपचार करने वाला चिकित्सक/सर्जन रोगी की ​​सम्पूर्ण स्थिति का पता लगाने के लिए कुछ परीक्षण करता है और उसके अनुसार आगे के उपचार की सलाह देता है।

नहीं। यह एक गलत धारणा है कि हृदय की सर्जरी की आवश्यकता हमेशा दवाओं और अन्य तरीकों को लंबे समय तक प्रयोग करने के बाद ही पड़ती है। अंतर्निहित स्थिति के आधार पर एक ओपन-हार्ट सर्जरी कई बार उपचार की पहली विधि या सर्वश्रेष्ठ विधि होती है। यदि आपको हृदय रोग है तो आपको उपचार की सर्वोत्तम विधि का चयन करने के लिए हृदय विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। हार्ट सर्जन से दूसरी राय लेने का विकल्प हमेशा होता है और हम हमेशा किसी विशेषज्ञ से दूसरी राय लेने की अनुशंशा करते हैं।

सर्जरी के सर्वोत्तम समय के बारे में कोई एकाकृत उत्तर नहीं है, यह उस स्थिति पर निर्भर करता है जिससे आप पीड़ित हैं। आपके  डॉक्टर आपकी शारीरिक स्थिति और अन्य मापदंडों के आधार पर आपको इस बारे में सलाह देंगे। सामान्य नियम यह है कि जटिलताओं के विकसित होने या हृदय में अपरिवर्तनीय परिवर्तन विकसित होने से पहले सर्जरी की जानी चाहिए।

यह एक सामान्य भ्रांति है कि हमें अधिक से अधिक समय तक दवाएं लेते रहना चाहिए और दवाओं की मदद से यथासंभव देर से ऑपरेशन करवाना चाहिए। यह सत्य नहीं है। एक बार जब आपको ऐसे हृदय रोग की पहचान हो जाती है जिसके लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है, तो आपके ऑपरेशन में बहुत अधिक विलम्ब करने का परामर्श नहीं दिया जाता है। ऑपरेशन में विलम्ब के साथ अंतर्निहित रोग प्रक्रिया अधिक उन्नत हो सकती है और कुछ मामलों में अपरिवर्तनीय भी हो सकती है। कई मामलों में यह देखा गया है कि यदि सर्जरी में अधिक समय तक देरी होती है तो सर्जरी में सम्मिलित ख़तरा बढ़ जाता है और परिणाम शीघ्र ऑपरेशन की तुलना कम अच्छे होते हैं। साथ ही, ऊपर बताए गए कारणों की वजह से ऑपरेशन में की गयी देरी से सम्पूर्ण स्वास्थ्य लाभ की संभावना भी कम हो जाती है। आपको इसके सम्बंध में एक विशेषज्ञ हृदय रोग विशेषज्ञ शल्य चिकित्सक का परामर्श लेना चाहिए और यथासम्भव शीघ्र ऑपरेशन के विकल्प का चयन करना चाहिए।

हाँ निश्चित रूप से।

जब भी माता-पिता को बताया जाता है कि बच्चे को जन्मजात हृदय रोग या ‘हृदय में छेद’ है, तो उन्हें बाल हृदय रोग विशेषज्ञ अथवा सर्जन का परामर्श अवश्य लेना चाहिए और भविष्य में भी बच्चे की जाँच उन्ही विशेषज्ञों से नियमित अंतराल पर निरंतर रूप से जारी रखनी चाहिए।

जन्मजात हृदय रोग कई प्रकार के होते हैं और उन सभी को आम जनता द्वारा हृदय में छेद के रूप में सम्बोधित किया जाता है। कुछ तथाकथित ‘हृदय में छेद’ इतने जटिल होते हैं कि उनकी ‘सही और सटीक’ पहचान और जाँच करने के लिए विशेषज्ञ हृदय रोग विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है। कुछ जन्मजात हृदय रोग या ‘हृदय में छेद’ ऐसे भी होते हैं जिनका तत्काल उपचार करने की आवश्यकता हो सकती है और कुछ के लिए जन्म के कुछ महीनों के अंदर ही सर्जरी की आवश्यकता होती है। इसलिए किसी प्रशिक्षित बाल हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना अत्यधिक आवश्यक है ताकि रोग के प्रकार की ‘सही और सटीक’ रूप से पहचान की जा सके और आगे के उपचार की सही रूप-रेखा एवं  योजना तय की जा सके।

हम इस तथ्य की ओर पुनः आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं ​​कि अगर आपसे एक बार कहा गया है कि बच्चे के बड़े होने पर छेद बंद हो सकता है, ‘फिर भी’ नियमित अंतराल पर बाल हृदय रोग विशेषज्ञ से बच्चे की पुनः-पुनः जाँच करवा कर परामर्श लेते रहना बहुत महत्वपूर्ण है। एक बार यह बताए जाने पर कि छेद समय के साथ बंद हो सकता है, कई माता-पिता यह गलती करते हैं की वे इसे ब्रह्म-सत्य और सुनिश्चित परिणाम मान कर कई वर्षों तक पुनः किसी विशेषज्ञ से परामर्श नहीं लेते हैं। यह सही नहीं है। बच्चे के बड़े होने पर हृदय के सभी छेद अपने आप बंद नहीं होते हैं, उनमें से कई को सर्जरी द्वारा बंद करने की आवश्यकता होती है। यह ‘छेद’ के प्रकार, स्थान, आकार, समय और अन्य विशेषताओं पर निर्भर करता है कि वह अपने आप बंद  होगा कि नहीं। उदाहरण के लिए, यदि एक वेंट्रिकुलर सेप्टल डीफ़ेक्ट (जो हृदय में सबसे ज़्यादा पाया जाने वाले प्रकार का छेद है) एक वर्ष की आयु तक बंद नहीं होता है, तो इसके अपने आप बंद होने की संभावना नहीं होती है और इसे एक सर्जरी द्वारा बंद करने की आवश्यकता पड़ती है। तो, स्वाभाविक प्रश्न यह है कि जब छेद समय के साथ बंद नहीं होता है तब क्या होता है? जब हृदय के कुछ छिद्र सही समय पर  स्वयं बंद नहीं होते हैं या सर्जरी द्वारा सही समय पर बंद नहीं किए जाते हैं, तो वे हृदय में कुछ ऐसे परिवर्तन कर सकते हैं  जिनके कारण उनको सर्जरी द्वारा भी बन्द कर पाना या तो असम्भव या फिर बहुत ज़्यादा ख़तरे भरा हो जाता हैं। संक्षेप में, ऐसे बच्चों के ऑपरेशन में देरी का अर्थ यह हो सकता है कि एक आसानी से उपचार किए जाने योग्य रोग या तो पूरी  तरह से लाइलाज हो जाता  है या फिर उनकी सर्जरी बहुत ज़्यादा जोखिम भरी हो जाती है। हम अक्सर ऐसे बच्चों से मिलते हैं जिनके माता-पिता ने यह सोच कर कई वर्षों से किसी विशेषज्ञ से परामर्श नहीं लिया कि समय के साथ हृदय का छिद्र अपने आप ठीक हो जाएगा और अब उनका छिद्र न केवल खुला रह गया है, बल्कि इससे ऐसे बदलाव आ गए हैं की अब बीमारी लाइलाज हो गयी है।

इसके अतिरिक्त, कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि हृदय का छिद्र अपने आप बंद होने की प्रक्रिया में पास के वाल्व को हानि पहुंचा देता है जिससे वाल्व में रिसाव प्रारम्भ हो जाता है – यह उपचार के लिए एक जटिल एवं पूरी तरह से परिहार्य समस्या है जिसे सही समय पर सही उपचार कर के रोका जा सकता है। इसलिए, अगर आपको बताया गया हो कि बच्चा बढ़ने पर छेद अपने आप बंद हो जाएगा फिर भी यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चे की जाँच बाल हृदय रोग विशेषज्ञ से नियमित अंतराल पर करवाते रहें। यदि आप ऐसा करते हैं, तो आपके बाल हृदय विशेषज्ञ कुछ आवश्यक जांच एवं कुछ परीक्षण कर के यह सुनिश्चित करेंगे कि छिद्र बंद हो गया है, और यह ‘ठीक से’ बंद हो रहा है। यदि वह पाते हैं कि छिद्र बंद नहीं हो रहा है या अवांछित जटिलताएं पैदा कर रहा है, तो वह बीमारी के बहुत ज़्यादा हानिकारक या लाइलाज होने से पहले समय आपको सर्जरी की सलाह देंगे।

किसी भी अन्य शल्य प्रक्रियाओं की तरह ओपन हार्ट सर्जरी में भी कुछ जोखिम शामिल होते हैं, लेकिन वे अत्यधिक अधिक नहीं होते हैं। उपचार के तौर-तरीकों और तकनीकों में प्रगति के साथ, आज ओपन हार्ट सर्जरी बहुत ही सुरक्षित तरीक़े से की जा रही है, और आम धारणा के विपरीत हार्ट सर्जरी एक अत्यंत ही सुरक्षित / भयरहित प्रक्रिया है। जटिलताओं के भय के कारण आपको पूरी तरह से स्वास्थ्य लाभ कराने वाली सर्जरी से दूर नहीं भागना चाहिए। हम कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य मृत्यु दर और जटिलता दर के साथ ओपन हार्ट सर्जरी कर रहे हैं और उपचार के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं से निपटने के लिए पूरी तरह से सक्षम हैं।

प्रत्येक प्रक्रिया के लिए संभावित जटिलताओं की सूची की गणना करना अथवा एक सुनिश्चित प्रतिशत सम्भावना बता पाना मुश्किल है क्योंकि वे अंतर्निहित बीमारी और रोगी की अन्य बीमारियों के आधार पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग अलग होते हैं। हम अपने सभी रोगियों के लिए  सर्जरी में सम्भावित जोखिम की गणना करने के लिए यूरोस्कोर II और एसटीएस स्कोर जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य गणकों का उपयोग करते हैं। जब किसी की ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है तो उसके लिए सहमति प्राप्त करने से पूर्व इन गणकों का प्रयोग कर के रोगियों और उनके रिश्तेदारों को विभिन्न जटिलताओं के व्यक्तिगत जोखिमों के सम्भावित ख़तरे की प्रतिशत सम्भावना के बारे में हमेशा बताया जाता है। हम आपको यह बताना चाहते हैं की ये प्रतिशत कोई ब्रह्म संख्याएँ नहीं है जो हमेशा सत्य ही हों बल्कि ये प्रतिशत यह दर्शाते हैं की समान रूप के अन्य रोगियों में इसी प्रकार की शल्य क्रिया करने पर तुलनात्मक रूप से ख़तरे की सम्भावना कितनी कम या ज़्यादा हो सकती है।

संक्षेप में, उपचार के रूप में हृदय शल्य चिकित्सा निश्चित रूप से हृदय रोग की तुलना में कम भयावह है, और आपको बीमारी से डरना चाहिए उपचार से नहीं।

हृदय के अधिकांश ऑपरेशन पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार किए जाते हैं। हृदय के ऑपरेशन के लिए भर्ती होने से पहले कुछ चीजें ध्यान में रखनी चाहिए।

हार्ट सर्जरी से पहले की जाने वाली बातें – “करें”

  • पहला ‘केवाईपी’ – ‘अपनी शल्य क्रिया को जानें‘ – अपने चिकित्सक से परामर्श करें

आपकी बीमारी और उसके उपचार के संबंध में आपके सभी प्रश्नों और चिंताओं के समाधान लिए आपका डॉक्टर आपका सबसे अच्छा मार्गदर्शक है। आपका डॉक्टर विस्तार से चर्चा करेगा और आपको समझाएगा कि आपकी बीमारी की प्रकृति क्या है, उपचार के विकल्प क्या हैं और प्रत्येक विकल्प के लाभ और हानि क्या हैं। वह आपको समझाएगा कि सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती होने से पहले क्या तैयारी की जानी चाहिए और सर्जरी के दिन और ऑपरेशन के बाद की अवधि में क्या उम्मीद करनी चाहिए। ये बहुत महत्वपूर्ण चर्चाएं हैं, और हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इन्हें बहुत ध्यान से सुनें और समझें। यदि आपको कोई संदेह है तो ‘प्रश्न पूछें’।

  • दूसरा ‘केवाईपी’ – ‘अपने नुस्खे को जानें‘

अक्सर चिकित्सक के सहायक या फार्मासिस्ट होते हैं जो आपको बताते हैं कि आपकी दवाएं कैसे और कब लेनी हैं। कभी-कभी कुछ दवाएं (जैसे खून पतला करने की दवाइए) हृदय की सर्जरी से पहले कुछ दिनों के लिए बंद की जानी चाहिए, और कुछ अन्य को सर्जरी से कुछ दिन पहले शुरू किया जाना चाहिए। इसलिए, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप इसे बहुत ध्यान से सुनें और न केवल उन दवाओं की खुराक और समय को समझें जिन्हें लेना है बल्कि उन दवाओं को भी जिन्हें छोड़ना है। यदि आपको कोई संदेह है तो ‘प्रश्न पूछें’।

  • तीसरा केवाईपी – ‘अपनी सावधानियों को जानें’

  • आपकी बीमारी की स्थिति और आपको किस प्रकार की हृदय शल्य चिकित्सा से गुजरना है, इसके आधार पर आपको कुछ विशिष्ट निर्देश दिए जा सकते हैं। ये हो सकते हैं

  •  
      • धूम्रपान बंद करना

      • शारीरिक व्यायाम में कमी करना(शायद ही कभी)

      • सर्जरी से पहले की रात के बाद से भोजन ना लेना

      • श्वास व्यायाम

      • डेंटिस्ट के पास जाना – खासकर यदि आप हार्ट वॉल्व का ऑपरेशन करवा रहे हैं

      • सर्जरी से पहले कुछ परीक्षण करना

  • आपको इन निर्देशों को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए और उनका सही रूप से पालन करना चाहिए। यदि आपको कोई संदेह है तो ‘प्रश्न पूछें’।

  •  
      • परामर्श के अनुसार सभी दवाएं लें, जिन दवाओं को रोकने का परामर्श दिया गया है उन्हें ना लें

      • परामर्श के अनुसार व्यायाम करें

      • धूम्रपान/तंबाकू छोड़ें

      • परामर्श के अनुसार उपरोक्त निर्देशों और सावधानियों का पालन करें

अस्पताल में प्रवेश के दिन

  • प्रवेश के दिन अपने साथ अस्पताल ले जाने के लिए चीजों की एक सूची बनाएं

  • सभी पुरानी मेडिकल रिपोर्ट और स्कैन अपने पास रखें

  • बीमा और मेडिक्लेम से संबंधित सभी दस्तावेज अपने पास रखें

  • अस्पताल में भर्ती होने में सहायता के लिए एक जिम्मेदार वयस्क व्यक्ति को अपने साथ लाएं

  • समय पर अस्पताल पहुंचें

  • अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें

  • यदि आपको कोई संदेह है तो ‘प्रश्न पूछें’।

इसके साथ ही आपको आवश्यकता हो सकती है

(सर्जरी के बाद अस्पताल से अपनी वापसी के बाद प्रयोग करने के लिए कुछ चीजों की व्यवस्था आपको सर्जरी से पहले ही करने की आवश्यकता हो सकती है।)

  • गृह सहायक की नियुक्ति

यदि कोई जिम्मेदार वयस्क आपकी सहायता के लिए घर पर उपलब्ध नहीं है तब यह आवश्यक है। हालांकि हृदय शल्य चिकित्सा के बाद, रोगी अपनी नियमित गतिविधियों को स्वयं कर सकते हैं और उन्हें शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, परंतु प्रारंभिक कुछ दिनों में उन्हें शारीरिक रूप से सहायता करने के लिए किसी की आवश्यकता हो सकती है। यह व्यवस्था पहले से ही कर लेनी चाहिए।

  • ‘अंग्रेज़ी शैली के शौचालय’ की व्यवस्था

यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन कुछ लोगों को सर्जरी के बाद अस्पताल से घर आने पर भारतीय शैली के शौचालयों से बैठने और उठने में कठिनाई महसूस हो सकती है। इस उद्देश्य के लिए कस्टम मेड कुर्सियां ​​बाजार में उपलब्ध हैं और यदि आवश्यक हो तो इनकी अनुशंसा की जाती है।

यह एक बहुत ही व्यापक गलत धारणा है। लोग सोचते हैं कि चूंकि हृदय शल्य चिकित्सा एक बड़ा ऑपरेशन है, इससे गंभीर दर्द और परेशानी होना स्वाभाविक रूप से तय है। ऐसा बिलकुल नहीं है। अब हमारे पास ऑपरेशन के बाद होने वाली पीड़ा के उपचार के लिए उत्कृष्ट दवाएं हैं जो प्रभावी और सुरक्षित दोनों हैं। ऑपरेशन के बाद का स्वास्थ्य लाभ पूर्णतः पीड़ा रहित रहे यह सुनिश्चित करने के लिए आजकल कई तरह की आधुनिक ‘नर्व ब्लॉक’ तकनीकों का भी प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर, मरीज ऑपरेशन के बाद की अवधि में सभी दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को दर्द के बिना करने में सक्षम होते हैं।

मिनिमली इनवेसिव कार्डिएक सर्जरी के आगमन के साथ, अब हृदय के कई ऑपरेशन बहुत छोटे चीरे से,  छाती की हड्डी को काटे बिना किए जाने लगे हैं। इससे हृदय की सर्जरी और भी ज़्यादा पीड़ा-मुक्त हो गई है। मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि रोगी को ज्यादा दर्द का अनुभव नहीं होता है और वह शीघ्र अपने सामान्य कार्यकलापों को फिर से शुरू कर देता है। मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी के बारे में अधिक जानने के लिए नीचे पढ़ें।

ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ की रूप रेखा से भिन्न प्रकार के ओपरेशनों के लिए भिन्न-भिन्न होती है। यहां तक ​​कि एक ही ऑपरेशन के लिए भी भिन्न-भिन्न व्यक्तियों में स्वास्थ्य लाभ भिन्न-भिन्न रूप से हो सकता है क्योंकि कोई भी दो व्यक्ति एक जैसे नहीं होते हैं और भिन्न-भिन्न लोगों के लिए रोग प्रक्रिया और इसके साथ में होने वाली समकालीन अन्य बीमारियाँ भी भिन्न-भिन्न होती हैं। ऑपरेशन के बाद होने वाले आपके स्वास्थ्य लाभ और इससे जुड़े हुए लाभ-हानि के पूर्वानुमान के बारे में अधिक जानने के लिए आपको सर्जरी से पहले अपने सर्जन के साथ इसके बारे में अधिक विस्तार से चर्चा करनी चाहिए। ऑपरेशन के बाद की अवधि में होने वाली गतिविधियों का संक्षिप्त सारांश नीचे दिया गया है। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी ‘हृदय शल्य चिकित्सा के बाद शीघ्र लाभ’ पुस्तिका को देखें।

ऑपरेशन के दिन:

ऑपरेशन के बाद सभी मरीजों को गहन चिकित्सा इकाई (आइ. सी. यू.) में रखा जाता है। पहले कुछ घंटों के लिए उन्हें बेहोश रखा जाता है और एक वेंटिलेटर से जोड़ा जाता है और कुछ घंटों के बाद वेंटिलेटर को हटा दिया जाता है और मरीजों को सचेत किया जाता है। हम वेंटिलेशन की अवधि को यथासंभव छोटा रखने के लिए प्रयास करते हैं, इस अवधि को कम रखने से स्वास्थ्य लाभ बेहतर और तेज गति से होता है।

ऑपरेशन के बाद अस्पताल में प्रारम्भिक कुछ दिन:

लगभग 1-3 दिनों की अवधि के लिए रोगियों को गहन चिकित्सा इकाई (आइ. सी. यू.) में रखा जाता है और अन्य दो से चार दिनों के लिए वार्ड में रखा जाता है। इस अवधि के दौरान विभिन्न मापदंडों को निगरानी में रखा जाता है और मरीजों को घर पर अपनी देखभाल करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय तक मरीज चलने, शौचालय जाने, एक या दो मंज़िल तक सीढ़ियां चढ़ने, सामान्य रूप से खाने और आवश्यक फिजियोथेरेपी अभ्यास करने में सक्षम होते हैं।

अस्पताल से छुट्टी के बाद:

आपके पास घर पर एक जिम्मेदार वयस्क व्यक्ति होना चाहिए जो गतिविधियों में रोगी की सहायता और देखभाल करने में सक्षम हो। यदि कोई वयस्क उपलब्ध नहीं है, तो एक अर्ध-कुशल घरेलू सहायक को काम पर रखने की अनुशंशा की जाती है। हृदय शल्य चिकित्सा के बाद विभिन्न दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों के बारे में सामान्य परामर्श निम्नलिखित हैं।

दवाइयाँ

– अस्पताल से छुट्टी के समय निर्धारित दवाओं के बारे में अच्छी तरह समझें

– सभी दवाएं सही मात्रा में और सही समय पर लें।

– अगर आपको लगता है कि दवाओं के कुछ दुष्प्रभाव हैं – तो इसे अपने डॉक्टर के ध्यान में लाएँ।

– दवाओं से दुष्प्रभाव की आशंका होने के पसचट भी दवाओं को स्वयं बंद न करें।

– अगर आपको कोई शंका हो तो अपने डॉक्टर से प्रश्न पूछें।

आहार

वेंटिलेटर निकालने के तुरंत बाद मरीजों को मौखिक तरल पदार्थ की अनुमति दी जाती है और सामान्य तौर पर वे ऑपरेशन के बाद के पहले दिन से पूरा आहार ले रहे होते हैं। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद कुछ रोगियों को भूख में कमी महसूस हो सकती है, यह सामान्य है। जब तक मधुमेह या कुछ विशेष स्थितियों से पीड़ित न हों, पहले ४-६ सप्ताह के लिए कोई आहार प्रतिबंधित नहीं हैं। यह उपचार की प्रारंभिक अवधि के लिए बढ़ी हुई पोषण और ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति के लिए आवश्यक है। आपको परामर्श दिया जाता है कि

– पर्याप्त मात्रा में घर का बना स्वक्ष और पौष्टिक भोजन लें

– भारी भोजन से बचें

– रेशे (फ़ाइबर) एवं प्रोटीन की प्रचूर मात्रा वाला भोजन लें

– सामान्य मात्रा में दूध, अंडे और मछली की का सेवन करने की अनुमति है

– ताजे मौसमी फल और सब्जियां भी पर्याप्त मात्रा में ली जा सकती हैं

– बहुत ज़्यादा मसालेदार या तैलीय भोजन से बचें, हालांकि हम सादे उबले हुए आहार की सलाह नहीं देते हैं

– आंशिक रूप से पके या बिना धुले कच्चे भोजन से बचें

– संक्रमण के भय से बाजारों में खुली दुकानों में बिकने वाले फलों के रस का सेवन ना करें

– आप डिब्बे-बंद फलों के रस ले सकते हैं

– यदि आप मधुमेह रोगी हैं तो हमेशा की तरह मधुमेह के लिए बताए गए आहार-प्रतिबंधों का पालन करें

ध्यान दें: जिन मरीजों का वॉल्व बदल दिया गया है और उन्हें रक्त पतला करने की दवाएं दी जाती हैं, उन्हें विटामिन K से भरपूर आहार (जैसे पालक, हरी पत्तेदार सब्जियां, पत्तागोभी आदि) कम से मध्यम मात्रा में लेने की सलाह दी जाती  है।

तरल पदार्थों का सेवन

इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है और इसलिए इसका अलग से उल्लेख किया गया है। हृदय शल्य क्रिया के पश्चात की तात्कालिक अवधि के में शरीर से आदान प्रदान होने वाले द्रवों की मात्रा को संतुलित करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

आपके हृदय की स्थिति के आधार पर आपको शल्य क्रिया के पश्चात कम से कम शुरुआती कुछ दिनों से लेकर हफ्तों तक सीमित मात्रा में तरल पदार्थ लेने की अनुमति होगी। आपको अपने चिकित्सक द्वारा अनुमत मात्रा से अधिक तरल पदार्थ नहीं लेने चाहिए। तरल पदार्थों में न केवल पानी बल्कि दूध, जूस, चाय-कॉफी और शराब भी सम्मिलित हैं।

घाव की देखभाल

– घाव के लिए किसी विशेष देखभाल की आवश्यकता नहीं होती है।

– सामान्य तौर पर, हम सलाह देते हैं कि घाव पर किसी भी मरहम या तेल का प्रयोग न करें।

– घावों को साबुन और पानी से साफ किया जा सकता है और उन्हें जोर से रगड़े बिना सुखाया जा सकता है।

शारीरिक गतिविधियां

– किसी भी हृदय शल्य चिकित्सा के बाद बिस्तर पर पूर्ण-विश्राम करने का परामर्श “नहीं” दिया जाता है।

– रोगियों को दिन भर सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है

– भारी वजन उठाने से बचें – इसमें पानी की एक बाल्टी या बच्चे को उठाना और उसके साथ खेलना शामिल है

– चलने पर हल्की कमजोरी या सांस फूलना सामान्य है – इसके कारण आपको चलने और व्यायाम करना नहीं छोड़ना चाहिए

– ऑपरेशन से छुट्टी के दिन से रोजाना नहाना प्रारम्भ करें, घावों को बिना ज्यादा जोर से रगड़े साफ, मुलायम कपड़े से थपथपा के सूखा लें

– विभिन्न शारीरिक गतिविधियों की एक अनुमानित समय-रेखा नीचे दी गई है

गतिविधि

समय जब इसे प्रारम्भ किया जा सकता है

बिस्तर से उठना

सामान्यतः ऑपरेशन के बाद के पहले दिन से

सहारे के साथ चलना

सामान्यतः ऑपरेशन के बाद के पहले दिन से

बिना सहारे के चलना शौचालय जाना

छुट्टी से पहले अस्पताल में ही

सीढ़ियां चढ़ना

छुट्टी से पहले अस्पताल में ही

छुट्टी के बाद भी आवश्यकतानुसार जारी रखें

नहाना

नलियों और IV लाइन हटा दिए जाने के बाद

छुट्टी के दिन से प्रतिदिन

सुबह की सैर

छुट्टी के दिन से प्रतिदिन

कार/रिक्शा से यात्रा करना

छुट्टी के दिन से कभी भी

जॉगिंग

ऑपरेशन के 12-14 सप्ताह बाद

साइकिल चलाना

ऑपरेशन के 12-14 सप्ताह बाद

कार चलाना

ऑपरेशन के 12-14 सप्ताह बाद

यौन गतिविधि

ऑपरेशन के 12-14 सप्ताह बाद

वजन उठाना (बहुत भारी नहीं)

ऑपरेशन के 12-14 सप्ताह बाद

मनोरंजक/प्रतिस्पर्धी खेल

आपके डॉक्टर के परामर्श से

नौकरी फिर से शुरू (हल्का काम)

छुट्टी के दिन से 4-6 सप्ताह बाद

नौकरी फिर से शुरू करना (कठिन काम)

अपने डॉक्टर के परामर्श से

धूम्रपान / तंबाकू

– सभी हृदय रोगियों के लिए धूम्रपान और सभी रूपों में तंबाकू दृढ़तापूर्ण वर्जित है

(जैसा कि सभी सामान्य स्वस्थ लोगों के लिए भी है)

मदिरा-पान

– यथासंभव आपको स्वास्थ्य पर इसके समग्र दुष्प्रभाव से सुरक्षा के लिए शराब के सेवन से बचना चाहिए

– अगर आप बाध्य हैं, तो आप

10-12% अल्कोहल युक्त पेय (जैसे वाइन) एक दिन में अधिकतम 120 मिलीलीटर तक एवं

40% अल्कोहल युक्त पेय (जैसे व्हिस्की, रम, जिन वोडका आदि) हर दूसरे दिन अधिकतम 50 मिलीलीटर तक

का सेवन कर सकते हैं।

– बीयर का सेवन न करें, क्योंकि इसमें ग्लिसरॉल की मात्रा होती है।

आगंतुक

किसी भी शल्य किया के पश्चात सम्बन्धियों, मित्रों और शुभचिंतकों को देखकर अच्छा लगता है। जब भी आप सहज महसूस करें, आप उनसे अपने घर पर मिल सकते हैं, लेकिन आपको बहुत अधिक आगंतुकों से बचना चाहिए क्योंकि उनमें से एक संक्रमण का स्रोत भी हो सकता है। यदि आप आगंतुकों द्वारा असुविधा महसूस करते हैं, तो आप विनम्रता से उनकी अवकाश मांग सकते हैं।

हृदय के ऑपरेशन के बाद होने वाली सामान्य छोटी समस्याएं

निम्नलिखित लक्षणों के लिए आपके सर्जन या क्लिनिक से सम्पर्क की आवश्यकता नहीं है

  • ऑपरेशन वाली जगह पर साधारण दर्द (दवा से कम हो जाता है)

  • थोड़ी कमजोरी

  • चलने पर हल्की सांस फूलना

  • हल्की खांसी

  • पैरों में हल्की सूजन

  • कभी-कभी हल्का चक्कर आना

  • थोड़ा बुखार आना जो निरंतर नहीं रहता या बार-बार नहीं होता

  • घाव से बहुत कम मात्रा में साफ पानी जैसा स्राव

  • कंधे या पीठ में दर्द

  • नींद में कमी

  • भूख में कमी

  • कब्ज

  • टिक-टिक करने की ध्वनि – यदि आपके हृदय के वाल्व का ऑपरेशन हुआ है और आपके हृदय में एक कृत्रिम धातु को हृदय वाल्व प्रत्यापित किया गया है, तो आपको कलाई घड़ी जैसे टिक-टिक की आवाज सुनाई देगी। आपको इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए। यह आवाज तब आती है जब वॉल्व खुलता और बंद होता है। वास्तव में, इस ध्वनि की उपस्थिति इंगित करती है कि वाल्व सुचारु रूप से काम कर रहा है।

हृदय शल्य क्रिया के पश्चात के चेतावनी संकेत

निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण होने पर आपको अपने सर्जन की सलाह लेनी चाहिए

  • बहुत तीव्र असहनीय पीड़ा

  • छाती में कट-कट जैसी आवाज़ होना (बहुत दुर्लभ)

  • बुखार जो कम नहीं हो रहा है या बार-बार हो रहा है

  • घावों से मवाद या दुर्गंधयुक्त स्त्राव

  • अत्यधिक सांस फूलना या पैरों में सूजन

  • पेशाब की मात्रा में कमी

कोई भी दो व्यक्ति एक जैसे नहीं होते। इसलिए एक ही बीमारी भी दो अलग-अलग लोगों में अलग-अलग रूप से व्यवहार करती है। एक व्यक्ति में सर्जरी के परिणाम, दूसरे व्यक्ति में परिणाम निर्धारित नहीं करते हैं। इसलिए, इस तथ्य से आपको डरना नहीं चाहिए कि आपके किसी परिजन को हृदय शल्य चिकित्सा के बाद बुरा अनुभव हुआ है। यह ऐसा कहने जैसा है कि बीस साल पहले राजधानी एक्सप्रेस दुर्घटना ग्रस्त हो गयी थी, इसलिए मुझे उस ट्रेन में सवार होने में भय लगता है। विगत कुछ वर्षों में, हमने हृदय शल्य क्रिया, हृदय सम्बन्धी औषधियों, बेहोशी की तकनीकों एवं शल्य क्रिया के बाद के गहन चिकित्सा के क्षेत्रों में शानदार प्रगति की है। वर्तमान समय में हृदय शल्य क्रिया अतीत की तुलना में अत्याधिक सुरक्षित है और किसी भी अन्य शल्य क्रिया के जैसी ही हो चुकी है। आपको आपके शल्य क्रिया में शामिल जोखिमों के बारे में सूचना और परामर्श शल्य क्रिया के पूर्व ही दिया जाएगा। चिकित्सा विज्ञान में निहित प्राकृतिक सीमाओं के कारण, कोई भी डॉक्टर आपको किसी भी परिणाम का शत-प्रतिशत आश्वासन नहीं दे सकता, परंतु हम शल्य क्रिया के पश्चात होने वाली समयाओं को कम से कम रखने के लिए निरंतर अथक प्रयास करते रहते हैं एवं विगत कई वर्षों  से कई जटिल शल्य क्रियाएँ भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य जटिलताओं और मृत्यु दर के साथ सुचारु रूप से सम्पन्न कर रहे हैं।

आपको रोग से भयभीत होना चाहिए इसके सही उपचार से  नहीं।

सबसे पहले, अत्यधिक चिंतित ना हों। चिंता से किस भी समस्या का समाधान संभव नहीं है। परंतु हां, कुछ सावधानियां आवश्यक हैं। विशेष रूप से हृदयाघात के लिए उत्तरदायी रोग कोरोनरी आर्टरी डीसीस के लिए आनुवंशिक आधार होने के स्पष्ट प्रमाण हैं। यदि आपके परिवार के किसी निकटवर्ती सदस्य (पिता, माता, सहोदर, चाचा, चाची, चचेरे भाई) को कोरोनरी आर्टरी डीसीस का पता चला है, तो यह भविष्य में आपके द्वारा इससे ग्रसित होने की सम्भावना को उच्च श्रेणी में डालता है। यद्यपि नीचे दी गई सावधानियां अन्य स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी उपयुक्त हैं, वे विशेष रूप से उन लोगों के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं जिनके पारिवारिक सदस्य कोरोनरी आर्टरी डीसीस से ग्रसित हैं।

हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श और नियमित निवारक जांच

परिवार के किसी सदस्य में कोरोनरी धमनी की बीमारी की पहचान होने के बाद परिवार के अन्य निकटवर्ती सदस्यों के लिए एक पूर्ण शारीरिक परीक्षण और जांच की दृढ़ अनुशंशा की जाती है। यह आपकी आधारभूत विशेषताओं के बारे में जानने के लिए आवश्यक है और यह सुनिश्चित करता है कि कोरोनरी धमनी रोग के विकास के लिए उत्तरदायी किसी अन्य कारक (नीचे देखें) से आप ग्रसित नहीं है। यह यह भी सुनिश्चित करता है कि यदि आपके पास पहले से कोई उत्तरदायी कारक हैं तो उनका यथा समय समुचित उपचार किया जा सके।

इसके साथ ही हर 1-3 साल के अंतराल पर हृदय विशेषज्ञ के साथ नियमित निवारक जांच (चेकअप) की जानी चाहिए। यदि आपका कोई निकटवर्ती आत्मजनों कोरोनरी धमनी के रोग से ग्रसित है, आपकी आयु 35 वर्ष होते इसकी शुरुआत की जानी चाहिए। जिस अंतराल पर चेकअप दोहराया जाना चाहिए, वह प्रत्येक व्यक्ति की आधारभूत विशेषताओं के अनुसार भिन्न होता है। हृदय विशेषज्ञ के साथ नियमित निवारक जाँच यह सुनिश्चित करती है कि बाद में विकसित होने वाले किसी भी उत्तरदायी रोग उत्पन्न करने वाले कारकों का समय पर पता चल जाए और उसके अनुसार उनका यथा समय समुचित उपचार किया जा सके।

हृदय रोगियों के आत्मजनों  के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण निवारक तरीका है और इसकी उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।

अन्य उत्तरदायी कारकों का उपचार और निगरानी।

(एक संक्षिप्त चर्चा यहां दी गई है, अधिक जानकारी के लिए “हृदय रोग के कारण” पर हमारा लेख देखें)

  1. नियमित रूप से अपने रक्तचाप की निगरानी करें

  2. अपने बीपी को नियंत्रित करें यदि यह उच्च है तो अपनी बीपी की औषधियाँ समय पर लें।

  3. नियमित रूप से अपने रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) के स्तर की जांच करें

  4. मधुमेह होने पर दवाएं लें और अपने रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य रखें

  5. नियमित रूप से अपने रक्त कोलेस्ट्रॉल की निगरानी करें

  6. कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक होने पर हृदय रोग विशेषज्ञ का परामर्श लें

जीवन शैली में संशोधन

यह उन लोगों के लिए आवश्यक एकल सबसे महत्वपूर्ण समाधान है जो कोरोनरी धमनी की बीमारी के विकास की सम्भावना की उच्च श्रेणी में हैं। कोरोनरी धमनी रोग के विकास के लिए तनाव एक महत्वपूर्ण उत्तरदायी कारक है। इसके निवरण के लिए तनाव मुक्त स्वस्थ जीवन शैली रखना बहुत आवश्यक है। यह उन लोगों के लिए भी समान रूप से महत्वपूर्ण है जिनके परिवार में कोरोनरी धमनी रोग से ग्रसित व्यक्ति नहीं है।

  1. नियमित शारीरिक व्यायाम – 20 मिनट की तेज सुबह की सैर पर्याप्त होगी

  2. योग, प्राणायाम और ध्यान – तनाव के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में सहायता करता है

  3. नियत दैनिक दिनचर्या का पालन करें – खाना, सोना, निश्चित समय पर उठना

  4. धूम्रपान त्याग करें

  5. सभी तंबाकू उत्पादों से बचें

  6. शराब का सेवन कम करें

  7. कोशिश करें कि आप अपने कार्यालय के काम को अपने घर न लाएं

  8. एक मित्र मंडली बनाए रखें और उनसे नियमित रूप से मिलें

  9. अपने आप को नियमित रूप से मनोरंजक गतिविधियों में संलग्न करें

  10. सुखद संगीत सुनें

  11. अच्छी पुस्तकें पढ़ें

(एक संक्षिप्त चर्चा ऊपर दी गई है, अधिक सूचना के लिए “तनाव और हृदय रोग” “व्यायाम और हृदय रोग” पर हमारा लेख देखें)

स्वस्थ आहार खाएं

(एक संक्षिप्त चर्चा नीचे दी गई है, अधिक जानकारी के लिए “तनाव और हृदय रोग” “आहार और हृदय रोग” पर हमारा अनुभाग देखें)

  1. कम वसा वाला आहार लें

  2. उच्च मात्रा में पॉली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड और कम मात्रा में संतृप्त फैटी एसिड लें

  3. उच्च फाइबर आहार लें

  4. अधिक मात्रा में अनाज और दालें लें

  5. हरी पत्तेदार सब्जियों का अधिक मात्रा में सेवन करें

  6. सभी मौसमी सब्जियां लें

  7. बिना पीले रंग के अंडे लें

  8. नमक का सेवन सीमित करें

  9. खाने के लिए तैयार जंक फूड से बचें

  10. मधुमेह या आपके किसी अन्य विशिष्ट रोग के लिए आहार प्रतिबंधों का पालन करें

वजन कम करें

आहार प्रतिबंधों और व्यायामों के मिश्रण से आदर्श शरीर के वजन को प्राप्त करने के लिए एक सचेत प्रयास किया जाना चाहिए।

अच्छी तरह सोएं

सभी वयस्कों के लिए छह से आठ घंटे की निर्बाध नींद अनिवार्य है। इससे वज़न नियंत्रित रहता है, मधुमेह, हृदय रोग और जीवनशैली व तनाव से जुड़ी अन्य बीमारियों से बचाव होता है।

“एसिडिटी” एवं ” एंजाइना” (दिल का दर्द)” ,में  भेद करना

जिसे आम तौर पर जनता द्वारा ‘गैस’ या ‘एसिडिटी’ या ‘हार्टबर्न’ के रूप में संदर्भित किया जाता है, वह आमाशय में उपस्थित अम्लीय रसायनों के भोजन नली में वापस आने के कारण उत्तपन्न होने वली समस्या है जिसे चिकित्सकीय रूप से गैस्ट्रो एसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी) कहा जाता है। दूसरी ओर एंजाइना या हृदय के दर्द की समस्या हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में वसा अथवा कोलेस्टेरोल की परत (प्लाक) जमा होने के परिणामस्वरूप आयी सिकुड़न के कारण होती है। धमनियों में आयी सिकुड़न  के कारण हृदय को आपूर्ति होने वली रक्त की मात्रा कम हो जाती है और हृदय में पीड़ा प्रारम्भ हो जती है। जब ये संकुचित धमनियां इनके अंदर के प्लाक के फटने या धमनियों में रक्त के थक्के जमने के कारण अचानक पूरी तरह से बंद हो जाती हैं, तब हृदय की रक्त आपूर्ति अचानक सम्पूर्ण रूप से बाधित हो जाती है एवं व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ता है। कुछ अन्य लोगों को अक्सर छाती में मांशपेशियों से दर्द उत्तपन्न होता है, इस प्रकर के दर्द की सही पहचान और हृदय के दर्द से इसका भेद करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है ताकी अंतर्निहित समस्या की सही पहचान कर के उसका यथासमय समुचित उपचार किया जा सके।

जीईआरडी (गैस / एसिडीटी) और एंजाइना (दिल का दर्द) के लक्षण अक्सर रोगियों के लिए बहुत समान और भ्रमित करने वाले होते हैं। गैस अथवा एसिड की समस्या मान कर अनदेखा किया गया छती का दर्द कई बार हृदय का दर्द सिद्ध होता है, इसलिए सीने की सभी तकलीफों/दर्द की साधारण एसिड और गैस की समस्या के रूप में उपेक्षा करना और खारिज करना प्राण-घातक समस्याओं का कारण बन सकता है। यह कई रोगियों द्वारा की जाने वाली एक बहुत ही सामान्य भूल है। बहुत लंबे समय तक वे अपनी छाती की परेशानी को ‘गैस’ और ‘एसिडिटी’ की समस्या के रूप में अनदेखा और खारिज करते रहते हैं और बाज़ार में  उपलब्ध ‘एंटासीड’ औषधियों का स्वतः उपभोग करते रहते हैं। जिसके कारण कोरोनरी धमनी की बीमारी की पहचान बहुत देर से होती है, यहाँ तक कि कभी-कभी केवल एक बड़े हार्ट अटैक के बाद ही इसकी पहचान हो पाती है।

कुछ संकेतक ऐसे हैं जो दिल के दर्द की उच्च संभावना की ओर संकेत करते हैं और कुछ ऐसे संकेतक हैं जो गैस / एसिडीटी (जीईआरडी) या मांसपेशियों से होने वाले दर्द के की संभावना की ओर संकेत करते हैं। तीनों की सामान्य विशेषताओं को यहां समझाया गया है, हालांकि यह दृढ़ता से अनुशंसा की जाती है कि जब भी आपको संदेह हो या जब भी लक्षण जल्द ही कम न हों तो आप अपने हृदय विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लें।

विशेषताएं जो दिल के दर्द की (एंजाइना ) ओर संकेत करती हैं:

  • छाती में भारीपन, निचोड़ने वाला दर्द, या दबाव   (व्यक्ति को ऐसा लगता है जैसे छाती पर कुछ भारी भार रखा गया है)

  • लक्षणों का शारीरिक गतिविधि के बाद होना

  • पूरे सीने में दर्द – व्यक्ति ‘उँगली से’ चिन्हित नहीं कर सकता वास्तव में दर्द कहाँ होता है   (यह पूछे जाने पर कि दर्द कहाँ है, व्यक्ति आमतौर पर अपना हाथ पूरी छाती पर रखता है)

  • बाएं कंधे, गर्दन, जबड़े, या गले, पीठ, या पेट में भारी दर्द या बेचैनी।

  • सीने में तकलीफ के साथ सांस की तकलीफ।

  • दर्द के साथ पसीना आना या अचानक थकान और निर्बलता प्रतीत होना

  • सिर में हल्कापन

  • उबकाई एवं उल्टी

  • घबराहट और हृदय का तेज धड़कना

  • हृदय रोग के अन्य उत्तरदायी कारकों / संकेतकों की उपस्थिति

यदि आप उपरोक्त में से किसी भी एक या अधिक लक्षण से ग्रसित हैं तो आपसे अनुरोध है कि आप अविलम्ब अपने हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें। अन्य व्यक्ति विशेष से सम्बंधित कारकों के साथ सभी लक्षणों की समय पर आलोचनात्मक समीक्षा यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि कोरोनरी धमनी की बीमारी की सही समय पर पहचान की जा सके और उचित उपचार किया जा सके।

विशेषताएं जो गैस / एसिड की समस्या (जीईआरडी) के कारण सीने में दर्द की ओर संकेत करती हैं:

  • दर्द/जलन का अहसास जो पेट से ऊपर छाती तक जाता है

  • जो खाने के तुरंत बाद होता है (हालाँकि एंजाइना भी भारी भोजन के बाद हो सकती है)

  • जो आगे झुकने/लेटने पर हो सकता है

  • जो शारीरिक गतिविधि या परिश्रम से संबंधित नहीं है

  • जो पसीना/धड़कन/घबराहट आदि से संबंधित नहीं है (ऊपर देखें)

  • जो रात में नींद के दौरान हो सकता है, व्यक्ति को नींद से जगा सकता है

  • जो साधारणतः छती के बीचो-बीच होता है

  • व्यक्ति उँगलियों से दर्द की जगह को चिन्हित कर सकता है

  • बार-बार डकार आना

  • मुंह में खटास

  • हाल ही में खाए गए भोजन का मुंह वापिस आना

  • रात में पेट से गले तक अम्लीय सामग्री का प्रवाह होना

  • लम्बे समय से चली आ रही सूखी खांसी

विशेषताएं जो मांशपेशियों (मस्कुलोस्केलेटल) के दर्द की ओर संकेत करती हैं:

  • बिना परिश्रम के होता है

  • आम तौर पर एक विशिष्ट स्थान पर ही होता है

  • शारीरिक गतिविधियों (शरीर के अंगों को हिलाने डुलाने)के साथ हो सकता है

  • आम तौर पर दर्द निवारक दवाओं से राहत मिलती है

हम एक बार पुनः इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं कि दिल के दौरे या दिल के दर्द के समय पर निदान के लिए सीने में दर्द या बेचैनी के सभी मामलों में एक त्वरित कार्रवाई बहुत महत्वपूर्ण है।अनभिज्ञात अथवा स्व-चिकित्सा के कारण निदान में की गयी देरी संभावित रूप से हानिकारक हो सकती है एवं प्राण-घातक भी सिद्ध हो सकती है।

साइलेंट हार्ट अटैक

हां, यह संभव है कि कोई व्यक्ति अपने दिल की धमनियों में रुकावट (कोरोनरी आर्टरी डिजीज) से पीड़ित हो, और यहां तक ​​कि उसे दिल का भी दौरा पड़  जाए परंतु दौरा पड़ने के पहले या दौरा पड़ने के दौरान उसे कभी भी सीने में दर्द का अनुभव ना हुआ हो। इसे साइलेंट हार्ट अटैक (साइलेंट एमआई) कहा जाता है।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज के 30% मरीज साइलेंट हार्ट अटैक से पीड़ित होते हैं और उन्हें कभी भी सीने में दर्द महसूस नहीं हुआ होता। जब वे अन्य कारणों से किसी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र पर जाते हैं तो उन्हें साइलेंट एमआई होने का पता चलता है। दूसरे शब्दों में, दिल का दौरा पड़ने की घटना जब घट रह होती है तब उसकी पहचान नहीं हो पाती है, परंतु बाद में, जब हृदय की मांसपेशियों को काफी नुकसान पहुंचा चुका होता है तभी उसकी पहचान हो पाती है। हालांकि, साइलेंट हार्ट अटैक से पीड़ित लोगों में दिल के दौरे के लिए  ज़िम्मेदार प्रक्रिया अन्य विशिष्ट दिल के दौरे के समान ही  होती है, जहां व्यक्ति को सीने में तेज दर्द होता है और दिल के दौरे के अन्य संकेत मिलते हैं, फिर भी रोगियों में  उपस्थित कुछ अन्य विशेषताओं के रिणामस्वरूप सामान्य रूप से दिखने वाले हृदयाघात के लक्षण या तो छिप जाते है या उन पर किसी का ध्यान नहीं जा पाता। इस बीमारी के बारे में जागरूक होना बहुत जरूरी है क्योंकि एक साइलेंट हार्ट अटैक किसी अन्य हार्ट अटैक से कम हानिकारक नहीं होता है। साइलेंट हार्ट अटैक के कारण दिल की विफलता का दीर्घकालिक जोखिम लगभग 35% तक बढ़ जाता है। वास्तव में, साइलेंट हार्ट अटैक अधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि इसका मतलब है कि रोगी बहुत देर से चिकित्सा की तलाश करते हैं जब हृदय की मांसपेशियों को अधिक व्यापक क्षति पहले ही हो चुकी होती है।

प्रश्न यह है कि कुछ दिल के दौरे लक्षण रहित क्यों रहते हैं?

साइलेंट हार्ट अटैक निम्न लोगों में अधिक आम हैं

  • मधुमेह – लंबे समय तक मधुमेह में दर्द की अनुभूति को वहन करने वाली नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और रोगी को दर्द का अहसास नहीं होता

  • गुर्दे (किडनी) की बीमारी से ग्रसित मरीज़– उपरोक्त कारणों से

  • महिलाएं – महिलाओं में अक्सर कोरोनरी धमनी की बीमारी के असामान्य लक्षण होते हैं और सीने में दर्द के बजाय सांस फूलने और थकान की शिकायत होती है

  • दर्द सहने के लिए बढ़ी हुई क्षमता वाले लोग

  • वे लोग जिनकी शारीरिक गतिविधि बहुत सीमित है

एक और प्रासंगिक प्रश्न यह है कि साइलेंट हार्ट अटैक की पहचान कैसे की जाए?

साइलेंट हार्ट अटैक के सामान्य लक्षण हैं:

  • सांस की तकलीफ – मधुमेह रोगियों में यह अक्सर सबसे आम लक्षण होता है

  • थकान और थकान

  • चक्कर आना

  • मतली और उल्टी

  • जबड़े और पीठ में दर्द

  • गैस की समस्या जो बहुत लंबे समय तक रहती है और कम नहीं होती – अक्सर एक सूचक होती है

जब भी किसी को उपरोक्त में से कोई भी लक्षण होता है या जब भी सीने में तकलीफ का कारण लंबे समय तक अज्ञात रहता है, तो यह सलाह दी जाती है कि आप किसी हृदय विशेषज्ञ से संपर्क करें और इसका निदान और उचित उपचार करवाएं।