हार्ट वाल्व रिपेयर हृदय वाल्व की मरम्मत (Heart Valve Repair)
हृदय में चार वाल्व होते हैं — माइट्रल, एऑर्टिक, ट्राइकसपिड और पल्मोनरी — जो रक्त प्रवाह को एक दिशा में नियंत्रित करते हैं। जब कोई वाल्व लीक करता है, सिकुड़ जाता है, या ठीक से बंद नहीं होता, तो हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ता है। हार्ट वाल्व रिपेयर (हृदय वाल्व की मरम्मत) एक शल्य प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य ख़राब कार्य कर रहे हृदय वाल्वों को बिना बदले ठीक करना है। यह रोगी के अपने वाल्व पर अत्यंत परिष्कृत शल्य तकनीकों का उपयोग करके किया जाता है, ताकि वाल्व फिर से सामान्य रूप से कार्य करने लगें। हार्ट वाल्व रिपेयर (वाल्व की मरम्मत) से वाल्व की सामान्य कार्य प्रक्रिया पुनर्स्थापित होती है, प्राकृतिक ऊतक संरक्षित रहते हैं तथा हृदय की कार्यक्षमता और दक्षता को बनाए रखने में सहायता मिलती है.
हार्ट वाल्व रिपेयर/ हृदय वाल्व की मरम्मत क्यों की जाती है?
हृदय वाल्व की मरम्मत उन मरीजों के लिए अनुशंसित है जो वाल्व के रिसाव (रिगरगिटेशन) अथवा सिकुड़न (स्टेनोसिस) जैसी स्थितियों से पीड़ित हैं। इसके सामान्य कारणों में उम्र के साथ वाल्व का क्षय, जन्मजात दोष, रूमेटिक हृदय रोग, या संक्रमण शामिल हैं। हार्ट वाल्व रिपेयर (मरम्मत ) को हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट (प्रतिस्थापन) पर इसलिए प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यह प्राकृतिक वाल्व को संरक्षित रखती है, जीवनभर दवाओं की आवश्यकता को कम करती है और लंबे समय तक बेहतर परिणाम देती है, विशेषकर माइट्रल और ट्राइकसपिड वाल्व रोग के मामलों में जब इसे अनुभवी केंद्रों में किया जाता है.
हार्ट वाल्व रिपेयर/ हृदय वाल्व की मरम्मत के लाभ
हार्ट वाल्व रिपेयर/ हृदय वाल्व की मरम्मत के कई लाभ हैं:
- यह प्राकृतिक वाल्व की संरचना और कार्य को संरक्षित रखती है।
- संक्रमण (एंडोकार्डाइटिस) के जोखिम को कम करती है।
- अक्सर जीवनभर रक्त पतला करने वाली दवाओं की आवश्यकता को समाप्त करती है।
- हृदय के पंपिंग क्षमता में सुधार करती है और समग्र रक्त संचरण को बेहतर बनाती है।
- तेज़ रिकवरी और लंबे समय तक टिकाऊ परिणाम प्रदान करती है।
हार्ट वाल्व रिपेयर/ वाल्व मरम्मत कराने वाले मरीज आमतौर पर कम जटिलताओं का सामना करते हैं और सर्जरी के बाद अधिक स्वाभाविक हृदय क्रिया का अनुभव करते हैं।
कई अध्ययनों में पाया गया है कि सफल हार्ट वाल्व रिपेयर/ वाल्व मरम्मत के पश्चात विशेषकर माइट्रल वाल्व के मामलों में, दीर्घकाल तक जीवित रहने की दर, और हृदय की कार्य क्षमता में सुधार की दर हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट (हार्ट वाल्व प्रतिस्थापन) की तुलना में बेहतर तथा पक्षाघात (स्ट्रोक) एवं संक्रमण (इन्फेक्शन) की संभावना हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट की तुलना में कम होती है।
हार्ट वाल्व रिपेयर / हृदय वाल्व मरम्मत के मुख्य प्रकार
- एन्यूलोप्लास्टी (Annuloplasty) — इस प्रक्रिया में वाल्व के चारों ओर स्थित रिंग (एन्यूलस) को सिला या मजबूत किया जाता है ताकि उसका आकार और सहारा पुनः स्थापित हो सके।
- लीफलेट रिपेयर (Leaflet Repair) — यदि वाल्व की पंखुड़ियां (लीफलेट्स) फट गई हों, फैल गई हों या क्षतिग्रस्त हों, तो सर्जन उन्हें पुनः आकार देकर या जोड़कर उनका सही बंद होना सुनिश्चित करते हैं।
- कॉर्डल रिपेयर या रिप्लेसमेंट (Chordal Repair or Replacement) — इसमें उन पतली टेंडन्स (कॉर्डे टेंडिनी) की मरम्मत या प्रतिस्थापन शामिल है जो वाल्व की गति को नियंत्रित करती हैं। यह आमतौर पर माइट्रल वाल्व सर्जरी में किया जाता है।
- कमिशुरोटॉमी (Commissurotomy) — यह प्रक्रिया उन वाल्वों के लिए की जाती है जो रोग प्रक्रिया के कारण संकरे हो गए हों। इसमें आपस में जुड़ी हुई वाल्व की पंखुड़ियों को सावधानीपूर्वक अलग किया जाता है ताकि रक्त प्रवाह बेहतर हो सके।
हर तकनीक का चयन वाल्व के प्रकार और समस्या की गंभीरता के आधार पर किया जाता है। कुछ एऑर्टिक वाल्व और एऑर्टिक रूट की स्थितियों में, उन्नत वाल्व-स्पेरिंग प्रक्रियाएँ (जैसे डेविड या याकूब प्रक्रियाएँ) भी की जा सकती हैं ताकि रोगी के अपने वाल्व को संरक्षित रखते हुए एऑर्टिक रूट की समस्या का इलाज किया जा सके।
हार्ट वाल्व रिपेयर/ हृदय वाल्व मरम्मत सर्जरी कैसे की जाती है?
हार्ट वाल्व रिपेयर सर्जरी पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी या मिनिमल इनवेसिव (छोटे चीरे से) ओपन-हार्ट सर्जरी के रूप में की जा सकती है।ओपन-हार्ट सर्जरी के दौरान मरीज को जेनरल एनेस्थीसिया (सम्पपूर्ण बेहोशी) दी जाती है।पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी में छाती की हड्डी (स्टर्नम) को काटकर हृदय तक पहुँचा जाता है, जबकि मिनिमली इन्वेसिव तकनीकों में छाती की पसलियों के बीच, सामने या बाईं ओर किसी भी हड्डी को काटे बिना, बहुत छोटे चीरे लगा कर हृदय तक पहुँचा जाता हैं।(इस पर अधिक जानकारी के लिए हमारे “मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी” अनुभाग को देखें)।
दोनों ही विधियों में, ऑपरेशन के दौरान मरीज को एक अत्याधुनिक मशीन, जिसे “हार्ट-लंग मशीन” कहा जाता है, से जोड़ा जाता है। यह मशीन सर्जरी के दौरान अस्थायी रूप से हृदय और फेफड़ों का कार्य करती है, ताकि हृदय को कुछ समय के लिए रोका जा सके और पूरी प्रक्रिया रक्त रहित क्षेत्र (ब्लडलैस फील्ड) में सुरक्षित रूप से की जा सके, जबकि मशीन शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त संचार बनाए रखती है। जब हृदय को रोका जाता है, सर्जन हृदय के संबंधित चैम्बर (कक्ष) को खोलकर क्षतिग्रस्त वाल्व की मरम्मत करते हैं। इसके लिए ऊपर वर्णित एक या एक से अधिक विशेष और जटिल तकनीकों का उपयोग किया जाता है।मरम्मत पूरी होने के बाद, सर्जन वाल्व की कार्यक्षमता की जाँच करते हैं, हृदय के चैम्बर को बंद करते हैं, हृदय को फिर से चालू करते हैं और मरीज को हार्ट-लंग मशीन से अलग कर देते हैं।
ऑपरेशन थिएटर में छाती बंद करने से पहले एक “ट्रांस-इसोफेजियल इकोकार्डियोग्राम (TEE)” किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरम्मत किया गया वाल्व और हृदय दोनों सही ढंग से कार्य कर रहे हैं।
हार्ट वाल्व रिपेयर/ हृदय वाल्व की मरम्मत के बाद रिकवरी
अधिकांश मरीज सर्जरी के बाद अस्पताल में 4 से 7 दिन बिताते हैं। घर पर रिकवरी आमतौर पर 4 से 6 सप्ताह में होती है, जो सर्जरी के प्रकार और रोगी की अंतर्निहित अवस्था पर निर्भर करती है। बहुत कम मामलों में कुछ मरीजों को पूरी ताकत वापस पाने में अधिक समय लग सकता है।
जोखिम और जटिलताएँ
हालांकि हार्ट वाल्व रिपेयर/ हृदय वाल्व की मरम्मत सुरक्षित और अत्यधिक प्रभावी प्रक्रिया है, संभावित जोखिमों में रक्तस्राव, संक्रमण, अनियमित धड़कन या वाल्व लीकेज की पुनरावृत्ति शामिल हो सकती है। कुछ मामलों में, यदि वाल्व मरम्मत विफल हो जाती है या समय के साथ लीकेज वापस आ जाता है, तो दोबारा सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
जोखिम प्रत्येक मरीज में अलग-अलग होते हैं और कई कारकों पर निर्भर करते हैं। यदि आपको हृदय वाल्व की मरम्मत की सर्जरी की सलाह दी गई है, तो अपने सर्जन से सभी जोखिम, लाभ और संभावित परिणामों पर विस्तार से चर्चा करें ताकि आप एक सूचित निर्णय ले सकें।
हृदय वाल्व मरम्मत बनाम वाल्व प्रतिस्थापन / हार्ट वॉल्व रिपेयर बनाम रिप्लेसमेंट
कई मरीजों के मस्तिष्क में यह स्वाभाविक प्रश्न होता है कि उन्हें मरम्मत करानी चाहिए या प्रतिस्थापन (रिप्लेसमेंट)। सभी क्षतिग्रस्त वाल्वों की मरम्मत संभव नहीं होती, और सभी मरीज हृदय वाल्व मरम्मत सर्जरी के लिए उपयुक्त उम्मीदवार नहीं होते। एक “हार्ट टीम” — जिसमें कार्डियक सर्जन, इकोकार्डियोलॉजिस्ट, स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज विशेषज्ञ और कार्डियक इंटेंसिव केयर विशेषज्ञ शामिल होते हैं — विभिन्न परीक्षणों के माध्यम से प्रत्येक मरीज की वाल्व स्थिति का मूल्यांकन करती है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि वाल्व की मरम्मत संभव है या नहीं। हमारी प्रैक्टिस में, हार्ट टीम की राय मरीज के साथ साझा की जाती है और उस पर चर्चा की जाती है, तथा सबसे उपयुक्त प्रक्रिया के बारे में एक सूचित निर्णय रोगी और हृदय टीम द्वारा संयुक्त रूप से लिया जाता है।
जहाँ भी वाल्व की मरम्मत संभव होती है, वहाँ वाल्व रिपेयर को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यह रोगी के अपने ऊतक को संरक्षित रखता है और अधिक टिकाऊ तथा प्राकृतिक कार्य सुनिश्चित करता है। दूसरी ओर, वाल्व प्रतिस्थापन तब किया जाता है जब क्षति इतनी गंभीर होती है कि मरम्मत संभव नहीं होती।
क्योंकि हृदय वाल्व मरम्मत सर्जरी में जीवनभर रक्त पतला करने वाली दवाओं की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, यह विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए अनुशंसित है जो प्रजनन आयु में हैं या गर्भधारण की योजना बना रही हैं, क्योंकि ऐसी दवाएँ भ्रूण में विकृतियों के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
कुछ उच्च जोखिम वाले रोगी जो ओपन सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होते, उनके लिए कैथेटर-आधारित मरम्मत विकल्प (कैथेटर बेस्ड रिपेयर) (जैसे माइट्रल वाल्व के लिए “ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर”) पर भी विचार किया जा सकता है। यह निर्णय भी हार्ट टीम द्वारा विस्तृत मूल्यांकन के बाद लिया जाता है।
MBBS, MS, MCh, FRCS-CTh,
FRCS-CTh(Ed), MEBCTS, FEBCTS, FACS(USA), DNB, MNAMS, MBA
Associate Director-Cardio-thoracic and Vascular Surgery, Yashoda Medicity, Ghaziabad(UP)
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
हार्ट वाल्व रिपेयर क्या है?
इस प्रक्रिया में मरीज के अपने वाल्व को बचाकर उसकी मरम्मत की जाती है, उसे बदलकर नया वाल्व लगाने की आवश्यकता नहीं होती।
वाल्व रिपेयर को रिप्लेसमेंट पर क्यों प्राथमिकता दी जाती है?
क्योंकि मरम्मत किए गए वाल्व:
स्वाभाविक रूप से बेहतर काम करते हैं
प्रायः जीवनभर खून पतला करने की दवा नहीं लेनी पड़ती
संक्रमण का जोखिम कम होता है
हृदय की दीर्घकालिक कार्यक्षमता बेहतर रहती है
किन वाल्वों की मरम्मत की जा सकती है?
मुख्य रूप से:
माइट्रल वाल्व
ट्राइकसपिड वाल्व
कभी-कभी, चयनित मरीजों में ऐओर्टिक वाल्व भी रिपेयर किया जा सकता है।
किन समस्याओं में वाल्व रिपेयर की आवश्यकता पड़ती है?
सामान्य कारण:
वाल्व का लीक होना (Regurgitation)
वाल्व का ढीला या prolapse होना
जन्मजात वाल्व दोष
कुछ मामलों में संकुचन (Stenosis)
वाल्व रिपेयर कैसे किया जाता है?
मरम्मत के सामान्य तरीके:
वाल्व की पत्तियों को आकार देकर सुधारना
अतिरिक्त ऊतक हटाना
फटी हुई पत्तियों की मरम्मत
एनुलोप्लास्टी (सपोर्टिंग रिंग लगाना)
क्या यह सर्जरी मिनिमली इनवेसिव या रोबोटिक तरीके से हो सकती है?
हाँ।
माइट्रल और ट्राइकसपिड वाल्व रिपेयर अक्सर छोटे चीरे, की-होल तकनीक, या रोबोटिक सर्जरी से किए जा सकते हैं।
सर्जरी के बाद रिकवरी में कितना समय लगता है?
सामान्यतः:
अस्पताल में रहना: 3–5 दिन
पूर्ण रिकवरी: 4–6 सप्ताह
मिनिमली इनवेसिव तकनीक में रिकवरी और तेज़ हो सकती है।
क्या रिपेयर के बाद खून पतला करने की दवा लेनी पड़ती है?
आम तौर पर जीवनभर दवा नहीं लेनी पड़ती।
कुछ मरीजों को अल्प अवधि के लिए दवा दी जाती है (जैसे अनियमित दिल की धड़कन में)।
रिपेयर किया गया वाल्व कितने समय तक चलता है?
अधिकांश मामलों में कई वर्षों तक—कभी-कभी जीवनभर—ठीक चलता है, यह रोग की गम्भीरता और तकनीक पर निर्भर करता है।
कौन-से मरीज वाल्व रिपेयर के लिए उपयुक्त होते हैं?
वाल्व रिपेयर उपयुक्त है यदि:
वाल्व लीक हो रहा हो पर संरचना ठीक हो
आप रक्त पतला करने की दवा से बचना चाहते हों
लंबी अवधि तक प्राकृतिक/सुरक्षित समाधान चाहते हों
निर्णय विस्तृत इको और परीक्षणों के बाद सर्जन लेते हैं।
इस विषय पर किसी भी प्रश्न के लिए यहां लिखें
Mail to: drkeshriheartcare@gmail.com or Click Here For WhatsApp (Text msg Only):