मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (MICS)

मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (MICS) हृदय संबंधी शल्यक्रियाओं (ओपन हार्ट ऑपरेशन)  की एक आधुनिक विधि है, जिसमें पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी की तरह छाती की हड्डी  (स्टर्नम) को पूरी काटने की आवश्यकता नहीं होती है। इसके स्थान पर सर्जन पसलियों के बीच छोटे चीरे लगाकर विशेष यंत्रों या रोबोटिक अथवा वीडियो डिवाइस की सहायता से सर्जरी करते हैं। इस तकनीक का उद्देश्य शरीर के अन्य अंगों को कम से कम आघात पहुँचाते हुए हृदय की कार्यक्षमता को पुनर्स्थापित करने के साथ-साथ ओपन हार्ट ऑपरेशन के बाद होने वाली पीड़ा एवं सम्पूर्ण स्वाथ्य लाभ (रिकवरी) में लगने वाले समय को कम करना होता है। यह तकनीक दोनों प्रकार की सर्जरी—वाल्व ऑपरेशन और बायपास ऑपरेशन —में प्रयोग की जा सकती है और विश्व के अग्रणी हृदय केंद्रों में अत्यंत लोकप्रिय हो रही है।

MICS पारंपरिक सर्जरी से कैसे भिन्न है?

  • हमारा हृदय छाती की गुहा में गहराई में स्थित होता है और पसलियों तथा आसपास की संरचनाओं से सुरक्षित रहता है। किसी भी प्रकार की हार्ट सर्जरी करने के लिए शरीर पर चीरा लगा कर हृदय तक पहुंचने की आवश्यकता होती है।  पारंपरिक और मिनिमली इनवेसिव हार्ट सर्जरी के बीच मुख्य अंतर इस तथ्य में है कि सर्जरी के लिए शरीर की सतह पर किस प्रकार चीरा लगाया जाता है जिससे हृदय तक पहुँचा जा सके।

  • पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी में हृदय तक पहुँचने के लिए छाती की हड्डी (स्टर्नम) को पूरी तरह काटना पड़ता है, जिसे पूर्ण स्टर्नोटोमी कहा जाता है। जबकि MICS में ऐसा नहीं किया जाता, इसमें पसलियों के बीच छोटे चीरे या स्टर्नम के केवल एक छोटे हिस्से को काटकर सर्जरी की जाती है।

  • अधिकांश MICS ऑपरेशनों में अभी भी हार्ट‑लंग बाईपास मशीन का उपयोग किया जाता है (जैसे वाल्व सर्जरी में), लेकिन कुछ MICS ऑपरेशनों में हृदय धड़कता हुआ ही रहता है और मशीन की आवश्यकता नहीं होती जैसे ऑफ‑पंप / बीटिंग‑हार्ट बाइपास सर्जरी।

  • पारंपरिक ओपन‑हार्ट सर्जरी और MICS के बीच एक अन्य अंतर यह भी है कि रोगी के रक्तसंचार को हार्ट‑लंग मशीन से कैसे जोड़ा जाता है। पारंपरिक ओपन‑हार्ट सर्जरी में मशीन से जुड़ी नलियाँ छाती के भीतर हृदय के पास स्थित बड़ी रक्त‑वाहिकाओं में सीधे जोड़ी जाती हैं, जबकि MICS में प्रायः ये नलियाँ कमर (ग्रोइन), गर्दन या छाती की दीवार की छोटी रक्त‑वाहिकाओं में जोड़ी जाती हैं।

  • यह व्यवस्था बहुत छोटे रोगियों या बच्चों में चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उनकी कमर की रक्त‑वाहिकाओं का आकार मानक नलियों के की तुलना में अत्यधिक छोटा होता है।

  • ट्रांस‑ऐक्सिलरी अप्रोच कहलाने वाली एक नई MICS तकनीक इस समस्या को दूर करने में सहायता करती है; इसमें चीरा बगल (ऐक्सिला) के क्षेत्र में लगाया जाता है (विस्तार से जानने के लिए हमारे ‘ट्रांस‑ऐक्सिलरी ओपन‑हार्ट सर्जरी’ अनुभाग को देखें)।

  • सामान्य रूप से MICS में आसपास के ऊतकों (मांसपेशियाँ, हड्डियाँ, पसलियाँ) को कम क्षति पहुँचती है, दर्द कम होता है, निशान छोटे होते हैं, अस्पताल में रहने की अवधि घट जाती है और रोगी सामान्य दिनचर्या में अधिक शीघ्र लौट पाता है।

MICS के प्रकार क्या हैं?

मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी कई प्रकार के छोटे चीरे (अपरोच) के माध्यम से की जा सकती है।

कौन‑सा अपरोच चुना जाएगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि हृदय की कौन‑सी संरचना पर ऑपरेशन किया जा रहा है, रोगी की शारीरिक बनावट कैसी है और सर्जन का अनुभव कितना है।

मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:

  1. अपर हेमी ‑ स्टर्नोटोमी (मिनी ‑ स्टर्नोटोमी)
    छाती की हड्डी (स्टर्नम) के केवल ऊपरी एक तिहाई हिस्से को ही काटा जाता है।

  1. लोअर हेमी ‑ स्टर्नोटोमी (मिनी-स्टर्नोटोमी)
    छाती की हड्डी (स्टर्नम) के केवल निचले एक तिहाई हिस्से को ही काटा जाता है।

  1. लेफ्ट या राइट एंटेरोलेटरल थोरेकोटॉमी
    छती की दीवार के किसी भी एक ओर पसलियों के बीच लगभग 5–7 सेमी का छोटा चीरा लगाया जाता है।

  1. ट्रांसऐक्सिलरी अप्रोच
    बगल (ऐक्सिला) के क्षेत्र में चीरा लगाया जाता है, जिससे सर्जन को हृदय तक पहुँच मिलती है।

MICS के क्या लाभ हैं?

रोगी के दृष्टिकोण से मिनिमली इनवेसिव हार्ट सर्जरी के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  • छोटे चीरे

  • छोटे निशान

  • कम ऊतक‑क्षति → कम दर्द

  • कम रक्तस्राव और रक्त चढ़ाने की कम आवश्यकता

  • संक्रमण और घाव से संबंधित जटिलताओं का कम जोखिम

  • ICU और अस्पताल में रहने की अवधि कम

  • जल्दी चल‑फिर पाना और सामान्य गतिविधियों में शीघ्र वापसी

  • सौंदर्य की दृष्टि से बेहतर परिणाम

  • दीर्घकालिक परिणाम (जीवित रहने की दर, टिकाऊपन) पारंपरिक सर्जरी के समान

MICS के क्या जोखिम और जटिलताएँ हैं?

यद्यपि MICS अन्य सभी आधुनिक हृदय की शल्य क्रियाओं की तरह ही सुरक्षित मानी जाती है, फिर भी यह एक बड़ी हृदय सर्जरी है। रोगियों को निम्न बिंदुओं के बारे में अवश्य जानकारी होनी चाहिए:

  • सामान्य रूप से होने वाले पर कम हानिकारक पोस्टऑपरेटिव जोखिम:

    • रक्तस्राव

    • अरेथमिया (अनियमित धड़कन)

    • घाव संबंधी संक्रमण/ जटिलताएँ

    • फेफड़ों के आसपास द्रव या रक्त का भराव (प्लूरल इफ्यूजन)

  • अधिक गंभीर लेकिन दुर्लभ जोखिम:

    • पक्षाघात (स्ट्रोक)

    • गुर्दे को क्षति (किडनी फेलियर)

    • फेफड़ों की जटिलताएँ (लंग कॉम्प्लिकेशन)

    • सुरक्षा के कारण सर्जरी के दौरान पूर्ण स्टर्नोटोमी में परिवर्तन की आवश्यकता

  • यदि रोगी की आयु अधिक हो, फेफड़ों की बीमारी हो, मोटापा हो, पूर्व में छाती पर रेडिएशन या सर्जरी हुई हो, या हृदय की संरचना अत्यंत जटिल हो, तो जोखिम बढ़ सकते हैं।

  • चूँकि चीरा छोटा होता है और एक्सपोज़र सीमित होता है, तकनीकी चुनौती अधिक होती है; इसलिए जोखिम को कम करने के लिए सर्जिकल टीम का अनुभव अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए सजग पोस्ट‑ऑपरेटिव देखभाल — जिसमें जल्दी चलना‑फिरना, दर्द पर अच्छा नियंत्रण, घाव की देखभाल और समय‑समय पर फॉलो‑अप — अत्यंत आवश्यक है।

MICS के लिए कौन‑कौन से रोगी उपयुक्त उम्मीदवार हैं?

वे रोगी जिन्हें छोटे चीरे से ऑपरेशन से सर्वाधिक लाभ मिल सकता है, सामान्यतः निम्नलिखित होते हैं:

  • जिनमें केवल एक वाल्व (एऑर्टिक या माइट्रल) की बीमारी हो और हृदय की पम्पिंग क्षमता अच्छी हो

  • जिनमें एक या दो कोरोनरी धमनियों में रुकावट हो और जहाँ मिनिमली इनवेसिव बायपास तकनीकी रूप से संभव हो

  • जिनकी छाती पर पूर्व सर्जरी से बहुत कम या बिल्कुल भी दाग‑धब्बे / चिपकाव न हों

  • जिनके फेफड़ों की कार्यक्षमता तथा समग्र स्वास्थ्य अच्छा हो

  • जो तेज़ रिकवरी, कम दर्द और छोटे निशान की इच्छा रखते हों

  • जिनका उपचार ऐसे केंद्रों में हो रहा हो जहाँ MICS तकनीकों का पर्याप्त अनुभव और उच्च केस‑वॉल्यूम हो

कौन‑से रोगी MICS के लिए उपयुक्त उम्मीदवार नहीं माने जाते?

कुछ रोगी जिनके लिए MICS उचित विकल्प नहीं माना जाता, सामान्यतः निम्नलिखित होते हैं:

  • जिनमें एक से अधिक वाल्वों की बीमारी हो और जिन्हें एक साथ कई वाल्व की मरम्मत / प्रतिस्थापन की आवश्यकता हो

  • जिन्हें वाल्व सर्जरी के साथ‑साथ जटिल कोरोनरी बायपास की भी आवश्यकता हो

  • जिनमें एऑर्टा में गंभीर कैल्सिफिकेशन हो

  • जिनमें कोरोनरी धमनियों की व्यापक बीमारी (मल्टी‑वेसल कोरोनरी आर्टरी डिजीस) हो

  • जिनकी छाती पर पूर्व में रेडिएशन या सर्जरी हो चुकी हो और अंदर चिपकाव (एडहीज़न) बन गए हों

  • जिनका हृदय अत्यंत कमजोर हो (बहुत कम इजेक्शन फ्रैक्शन)

  • जिनमें फेफड़ों की गंभीर बीमारी हो

  • जिनमें छाती की दीवार की विकृति (चेस्ट वाल डिफ़ॉर्मिटी) हो

  • अत्यधिक मोटापा

  • वे मामले जिनमें पारंपरिक बड़े चीरे वाला अप्रोच बेहतर दृश्यता और अधिक सुरक्षित पहुँच प्रदान करता हो

  • वे स्थितियाँ जहाँ हार्ट टीम पारंपरिक सर्जरी को ही रोगी के लिए बेहतर विकल्प मानती हो।

कैसे तय किया जाता है कि आप MICS के लिए अच्छे उम्मीदवार हैं या नहीं?

उचित उम्मीदवार का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और इसमें निम्न बिंदु शामिल होते हैं:

  • विस्तृत इमेजिंग: इकोकार्डियोग्राफी, छाती और एऑर्टा का सीटी स्कैन, कोरोनरी एंजियोग्राफी, तथा कुछ मामलों में एमआरआई / फेफड़ों की कार्यक्षमता (पल्मोनरी फंक्शन) जाँच MICS की अनुशंसा करने के पूर्व अत्यंत आवश्यक है.

  • बहुअनुशासनात्मक हार्ट टीम द्वारा मूल्यांकन: कार्डियक सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट और इमेजिंग विशेषज्ञ के एक टीम संयुक्त रूप से रोगी से जुड़े सभी चिकित्सात्मक तथ्यों का अध्यन करने के पश्चात अपनी अनुशंसा देती है

  • रोग की गंभीरता, रोगी की शारीरिक बनावट, रोगी में मौजूद अन्य रोग (फेफड़े, गुर्दे, मधुमेह की बीमारी), पूर्व सर्जरी तथा रोगी के लक्ष्य (रिकवरी का समय, सौंदर्य सम्बन्धी अपेक्षाएँ) का आकलन भी MICS की अनुशंसा के पूर्व व्यापक रूप से किया जाना चाहिए.

  • रोगी के साथ जोखिम, लाभ और अन्य विकल्पों (पारंपरिक सर्जरी, कैथेटर‑आधारित प्रक्रियाएँ) पर विस्तृत चर्चा MICS की प्रक्रिया करने के पूर्व की जाती है.

  • अंतिम निर्णय इस संतुलन के आधार पर लिया जाता है कि मिनिमली इनवेसिव लाभों की तुलना सर्जिकल एक्सपोज़र और सुरक्षा से कैसे सामंजस्य बैठाती है।

MICS के बाद रिकवरी कैसी होती है?

MICS ऑपरेशन के बाद सामान्य रिकवरी की समय‑रेखा प्रायः इस प्रकार होती है:

  • ICU में रहना: प्रायः 1–2 दिन।

  • अस्पताल में रहना: अनेक मिनिमली इनवेसिव मामलों में सामान्यतः 2–5 दिन (जबकि पारंपरिक ओपन सर्जरी में अक्सर 5–10 या अधिक दिन)।

  • शीघ्र चलफिरना: रोगी आमतौर पर 24–48 घंटों के भीतर सहारे के साथ उठ‑बैठ और चलना शुरू कर देते हैं।

  • हल्की गतिविधियों में वापसी: सामान्यतः 2–3 सप्ताह के भीतर; प्रक्रिया के प्रकार और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार प्रायः 6–7 सप्ताह में पूरी रिकवरी हो जाती है.

  • घाव की देखभाल: छोटे चीरों की उचित सफाई और ड्रेसिंग, छाती की ट्यूब (ड्रेन) हटाना, दर्द पर नियंत्रण और श्वास से सम्बन्धित व्यायाम शीघ्र कम पर वापसी सुनिश्चित करती है.

  • कार्डियक रिहैबिलिटेशन: निगरानी में कराया जाने वाला व्यायाम और शिक्षण कार्यक्रम, जिससे ताकत व सहनशीलता वापस आए और हृदय की कार्यक्षमता पुनर्स्थापित की जा सके, MICS की सफलता को सुनिश्चित करता है.

  • काम पर लौटना, वाहन चलाना और यात्रा: यह सब सर्जन / कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह और आपकी व्यक्तिगत रिकवरी की गति के अनुसार तय किया जाता है, साधारणतः 6-8 सप्ताहों के पश्चात किसी भी प्रकार की रोक टोक की आसावश्यकता नहीं होती है.

MICS के बाद किस प्रकार का फॉलो‑अप आवश्यक होता है?

पोस्ट‑ऑपरेटिव फॉलो‑अप पूर्ण शारीरिक गतिविधि में सुरक्षित रूप से वापसी सुनिश्चित करने के लिए अत्यन्त आवश्यक होता है। फॉलो-अप में निमलिखित अनिवार्य हैं –

  • अपने कार्डियक सर्जन / कार्डियोलॉजिस्ट के साथ नियमित ओपीडी मुलाक़ातें।

  • इमेजिंग जाँच: वाल्व / रिसाव की स्थिति देखने के लिए इकोकार्डियोग्राफी, तथा बायपास के लिए ग्राफ्ट की खुली स्थिति (पेटेंसी) की जाँच।

  • नियमित रक्त परीक्षण (गुर्दे, यकृत की जाँच तथा यदि आवश्यकता हो तो एंटीकोएग्युलेशन स्तर की जांच)।

  • जीवनशैली की निगरानी: आहार, व्यायाम, धूम्रपान छोड़ना, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह का नियंत्रण MICS से मिलने वाले लाभों की समग्रता को सुनिश्चित करता है।

  • दवाओं का नियमित सेवन: आवश्यकता के अनुसार एंटी‑प्लेटलेट, स्टेटिन और एंटीकोएग्युलेन्ट दवाएँ अनुमोदित रूप से ले जानी चाहिए।

  • जटिलताओं के लक्षणों के प्रति जागरूकता: घाव में लालिमा / सूजन, बुखार, अनियमित धड़कन, सांस फूलना, पैरों में सूजन आदि जो भी सामान्य रूप से होने वाली समस्याएं हैं उनके विषय में आपके सर्जन आपको जागरूक करेंगे।

  • दीर्घकालिक निगरानी: वाल्व वाले रोगियों के लिए इंफेक्टिव एंडोकार्डाइटिस की रोकथाम (प्रोफिलैक्सिस) और एंटीकोएग्युलेशन का उचित स्तर बनाए रखना, तथा बायपास वाले रोगियों के लिए कोरोनरी रोग की प्रगति को नियंत्रित करना, दीर्घकालिक स्वस्थ जीवन के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

MICS में हाल की प्रगति और भविष्य की संभावनाएँ

चिकित्सा क्षेत्र में हो रही चहुर्मुखी प्रगति के साथ‑साथ MICS तकनीक भी बहुत तेज़ी से विकसित हो रही है। MICS के क्षेत्र में मुख्य प्रगति इस प्रकार हैं:

  • रोबोटिक‑सहायता प्राप्त कार्डियक सर्जरी का बढ़ता उपयोग

  • लगातार छोटे होते जा रहे पोर्ट‑साइट या ‘छेद’ (इंस्ट्रूमेंट प्रवेश बिंदु)

  • टोटली एंडोस्कोपिक कोरोनरी बायपास (TECAB) – बायपास ऑपरेशन जो पूर्णतः एंडोस्कोप के माध्यम से किया जाता है।

  • हाइब्रिड ऑपरेटिंग थिएटर, जहाँ इमेज‑निर्देशित और शल्य प्रक्रियाएँ एक साथ की जाती हैं।

  • सर्जरी से पहले बेहतर इमेजिंग और 3‑डी मॉडलिंग, ताकि प्रत्येक रोगी के लिए विशिष्ट MICS अप्रोच की योजना बनाई जा सके

  • रोगियों की निगरानी के लिए अधिक से अधिक उन्नत उपकरण

  • और भी छोटे तथा अधिक उन्नत मिनिमल‑एक्सेस शल्य उपकरण

चल रहे शोध से यह प्रतीत होता है कि उपयुक्त रूप से चुने गए रोगियों में MICS के परिणाम पारंपरिक सर्जरी के बराबर या उससे भी बेहतर हो सकते हैं।

रोगियों के लिए अतिरिक्त उपयोगी जानकारी

यदि आपको ओपन‑हार्ट ऑपरेशन की सलाह दी गई है और आप मिनिमली इनवेसिव अप्रोच अपनाने पर विचार कर रहे हैं, तो कृपया निम्न महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें:

  • अपने सर्जन से उनके MICS अनुभव और प्रति वर्ष किए जाने वाले मामलों की संख्या के बारे में स्पष्ट रूप से पूछें, क्योंकि परिणाम अक्सर अनुभव के सीधे अनुपात में होते हैं।

  • कन्वर्ज़न के जोखिम को समझें – यद्यपि ऐसा कम होता है, फिर भी ऑपरेशन के दौरान यदि कोई समस्या आए तो MICS को पूर्ण स्टर्नोटोमी में बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है।

  • यथार्थवादी अपेक्षाएँ रखें – रिकवरी भले ही तेज़ हो, फिर भी आपको पर्याप्त समय, आराम और नियमित फॉलो‑अप की आवश्यकता होगी; यह एक बड़ी सर्जरी है।

  • अपने लक्ष्य स्पष्ट रखें – यदि आपके लिए छोटे निशान और जल्दी सामान्य जीवन में लौटना महत्वपूर्ण है, तो अपने सर्जन से पूछें कि क्या आपके लिए MICS व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प है।

  • पुनर्वास और जीवनशैली में बदलाव के लिए तैयार रहें – सर्जरी केवल पहला कदम है; दीर्घकालिक हृदय‑स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करेगा कि आप सर्जरी के बाद अपना जीवन कैसे जीते हैं और कितनी अच्छी आदतों को अपनाते हैं।

  • यह सुनिश्चित करें कि जिस केंद्र में आपका MICS होने जा रहा है वहाँ पूर्ण कार्डियक सर्जरी सुविधा, ICU देखभाल और अनुभवी टीम उपलब्ध हो, ताकि आवश्यकता पड़ने पर हर प्रकार का बैक‑अप तुरंत मिल सके।

  • बीमा और लागत सम्बन्धी तथ्यों की अग्रिम पुष्टि कर लें – उन्नत तकनीक के कारण MICS की लागत कभी‑कभी थोड़ी अधिक हो सकती है; अपने बीमा प्रदाता से यह अवश्य जाँच लें कि यह प्रक्रिया आपकी पॉलिसी में आवृत है या नहीं।

  • दूसरी राय (सेकंड ओपिनियन) लेने में संकोच न करें – विशेष रूप से जटिल मामलों में। यदि आपको बताया गया है कि आप MICS के लिए उपयुक्त उम्मीदवार नहीं हैं, तो केवल पुष्टि के लिए ही सही, किसी अन्य अनुभवी केंद्र से दूसरी राय अवश्य लें।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

MICS क्या है?

MICS एक उन्नत ओपन-हार्ट सर्जरी तकनीक है जिसमें पूरे सीने को खोले बिना छोटे चीरे के माध्यम से हृदय तक पहुँचा जाता है।

MICS का उपयोग इन स्थितियों में किया जा सकता है:
• वाल्व रिपेयर/रिप्लेसमेंट
• ASD/VSD बंद करना
• कुछ मामलों में CABG
• हृदय के ट्यूमर
• कुछ एऑर्टिक प्रक्रियाएँ

हाँ। अनुभवी केंद्रों में यह उतनी ही सुरक्षित एवं प्रभावी है।

  • छोटा चीरा

  • कम दर्द

  • कम रक्तस्राव

  • शीघ्र स्वस्थ होना

  • कम अस्पताल-निवास

  • बेहतर सौंदर्यात्मक परिणाम

अधिकांश मरीज 2–4 सप्ताह में सामान्य दैनिक गतिविधियों में लौट आते हैं।

नहीं। चीरा छोटा (4–6 सेमी) होता है और आमतौर पर कम दिखाई देता है।

नहीं। यह रोग के प्रकार, शारीरिक संरचना और जाँच रिपोर्टों पर निर्भर करता है।

हाँ, कई मरीजों में रक्तस्राव, संक्रमण और लंबी अस्पताल-निवास का जोखिम कम होता है।

अधिकतर मरीज 3–4 सप्ताह में हल्का काम और यात्रा शुरू कर सकते हैं।

उपकरणों और तकनीकी कारणों से खर्च थोड़ा अधिक हो सकता है, परन्तु तेज़ रिकवरी के कारण कुल लागत संतुलित हो जाती है।

 इस विषय पर किसी भी प्रश्न के लिए यहां लिखें

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