रोबोट असिस्टेड कार्डियक सर्जरी (Robot-Assisted Cardiac Surgery)

रोबोट असिस्टेड कार्डियक सर्जरी क्या है?

रोबोट असिस्टेड कार्डियक सर्जरी एक अत्याधुनिक तकनीक है जिसमें हृदय की जटिल शल्य क्रियाएँ छाती की हड्डी (स्टर्नम) को काटे बिना, पसलियों के बीच बने छोटे-छोटे छिद्रों से की जाती हैं।
इन छिद्रों का आकार सामान्यतः 5–12 मिलीमीटर होता है।

इस पद्धति में सर्जन एक विशेष रोबोटिक प्रणाली — सबसे अधिक दा विंची सर्जिकल सिस्टम — का उपयोग करता है।
यह प्रणाली:

  • हृदय का 10-गुना बड़ा 3-D दृश्य (3D-HD Vision) देती है,

  • सर्जन की सभी गतियों को सूक्ष्म, स्थिर और अत्यधिक नियंत्रित रूप में दोहराती है,

  • और उन स्थानों तक पहुँचने की क्षमता देती है जहाँ सामान्य उपकरण नहीं पहुँच पाते।

सार:
यह तकनीक बड़ी कटाई-छटाई के बिना, अत्यंत सटीकता और न्यूनतम दर्द के साथ, हृदय की जटिल से जटिल शल्यक्रियाएँ सम्भव बनाती है।

रोबोटिक तकनीक की आवश्यकता क्यों पड़ी?

पारंपरिक हृदय-शल्यक्रिया (open-heart surgery) में:

  • छाती की हड्डी को बीच से काटना पड़ता है,

  • घाव बड़ा होता है,

  • दर्द अधिक होता है,

  • संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है,

  • रिकवरी 6–8 सप्ताह तक लगती है।

रोबोटिक तकनीक इन सभी चुनौतियों को कम कर देती है।

रोबोटिक तकनीक के प्रमुख लाभ:

✔ छोटे छिद्र — बड़ा चीरा नहीं

✔ कम दर्द

✔ शीघ्र रिकवरी (2–3 सप्ताह)

✔ कम रक्तस्राव

✔ निशान लगभग अदृश्य

✔ संक्रमण का कम जोखिम

✔ सूक्ष्मतम स्तर पर सटीकता

✔ स्थिर उपकरण हाथ का कंपन समाप्त

✔ जटिल हृदय-रचनाओं को स्पष्ट रूप से देखना सम्भव

इसी कारण दुनिया भर में रोबोटिक शल्यचिकित्सा को “भविष्य की हृदय-शल्यक्रिया” कहा जाता है।

रोबोटिक हृदय-शल्यक्रिया कैसे कार्य करती है?

रोबोट स्वयं सारे काम नहीं करता।
सर्जन ही हर नियंत्रण करता है।
रोबोट केवल सर्जन की गतियों को और अधिक सूक्ष्मस्थिर, और सटीक बनाता है।

चरण-दर-चरण प्रक्रिया:

(1) पसलियों के बीच छोटे पोर्ट बनाना

छाती में 3–5 छोटे छिद्र बनाए जाते हैं, जिनसे उपकरण और कैमरा अन्दर जाते हैं।

(2) रोबोटिक प्रणाली को रोगी से जोड़ना (Docking)

रोबोटिक भुजाएँ इन पोर्ट्स से जोड़ दी जाती हैं।

(3) 3D कंसोल पर सर्जन का नियंत्रण

सर्जन कुछ फीट दूर बैठकर 3-D दृश्य देखने और नियंत्रित करने हेतु कंसोल का उपयोग करता है।

(4) सूक्ष्म गति और उच्च सटीकता

रोबोटिक उपकरण 360 डिग्री तक घूम सकते हैं — यह मनुष्य की कलाइयों से भी अधिक लचीला होता है।

(5) हृदय-शल्यक्रिया का सम्पादन

पूरी प्रक्रिया बिना छाती की हड्डी काटे पूर्ण होती है।

रोबोट की सहायता से की जाने वाली हृदय-शल्यक्रियाएँ (विस्तृत सूची)

रोबोटिक CABG (Coronary Artery Bypass Grafting)

विस्तृत जानकारी के लिए रोबोटिक CABG के विषय पर हमारा अनुभाग देखें

  • रोबोटिक LIMA–LAD
  • TECAB (टोटली एंडोस्कोपिक CABG)
  • रोबोटिक MIDCAB
  • हाईब्रिड कोरोनरी रिवेस्क्युलराइज़ेशन (बाइपास + स्टेंट)

विशेषता:
छाती की हड्डी बिना काटे बाइपास।

रोबोटिक माइट्रल वाल्व सर्जरी (Robotic Mitral Valve Surgery)

उपयुक्त स्थितियाँ:

  • माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन
  • माइट्रल वाल्व प्रोलैप्स
  • माइट्रल स्टेनोसिस
  • रूमेटिक वाल्व डिजीस

रोबोट से की जाने वाली प्रक्रियाएँ:

  • एन्युलोप्लास्टी रिंग लगाना
  • लीफलेट रिपेयर करना
  • कृत्रिम (मेकेनिकल/बायोलॉजिकल) वाल्व प्रत्यारोपण (वाल्व रिप्लेसमेंट)
  • कोर्डा का पुनर्निर्माण (कार्डल रिकंस्ट्रक्शन्स)

रोबोटिक तकनीक माइट्रल वाल्व की अत्यंत उत्कृष्ट मरम्मत (repair) सम्भव बनाती है।

रोबोटिक ट्राइकस्पिड वाल्व सर्जरी

उपयुक्त स्थितियाँ:

  • ट्राइकस्पिड रिगर्जिटेशन
  • ट्राइकस्पिड स्टेनोसिस
  • दोहरी वाल्व बीमारी (Mitral + Tricuspid)

रोबोटिक ASD क्लोज़र (Atrial Septal Defect Closure)

सेकंडम ASD को रोबोट द्वारा सीकर या पैच लगाकर बंद किया जा सकता है।
निशान छोटा, दर्द कम, रिकवरी तेज।

रोबोटिक कार्डियक ट्यूमर रिसेक्शन (Cardiac Tumor Resection)

जैसे:

  • लेफ्ट एट्रियल मिक्सोमा
  • राइट एट्रियल ट्यूमर
  • प्राइमरी/मेटास्टैटिक ट्यूमर

रोबोटिक तकनीक से ट्यूमर हटाना अत्यंत सुरक्षित, सूक्ष्म और तेज होता है।

रोबोटिक एट्रियल फिब्रिलेशन सर्जरी / रोबोटिक मेज़ प्रोसीजर

(Robotic MAZE Procedure)

उपयोग:

  • लगातार AF
  • AF + वाल्व रोग
  • AF + ASD

रोबोट द्वारा एब्लेशन लाइनों का निर्माण अत्यंत सटीक होता है, जिससे एट्रियल फीब्रिलेशन में सुधार मिलता है।

रोबोटिक पेरिकार्डियल प्रक्रियाएँ

(1) रोबोटिक पेरिकार्डियल विंडो

हृदय के चारों ओर जमा द्रव (पेरिकार्डियल इफ़्यूशन) की निकासी।

(2) पेरिकार्डिएक्टोमी (संकीर्ण मामलों में)

कुछ रोगियों में छाती काटे बिना सम्भव।

(3) पेरिकार्डियल सिस्ट का निष्कासन

साफ-सुथरा, उत्कृष्ट परिणाम।

रोबोटिक लेफ्ट एट्रियल अपेंडेज (LAA) लाईगेशन

एट्रियल फीब्रिलेशन के रोगियों में स्ट्रोक रोकने में अत्यंत सक्षम।

रोबोटिक कार्डियक नर्व सर्जरी (Sympathetic Denervation Surgery)

बहुत दुर्लभ परन्तु सम्भव।

रोबोटिक पैपिलरी मसल रिपेयर, कोर्डल रिकंस्ट्रक्शन, और काम्प्लेक्स वाल्व रिकंस्ट्रक्शन

ये अत्यधिक सूक्ष्म प्रक्रियाएँ रोबोटिक प्लेटफ़ॉर्म पर सबसे श्रेष्ठ मानी जाती हैं।

संयुक्त रोबोटिक प्रक्रियाएँ

कुछ रोगियों में एक ही समय पर:

  • माइट्रल + ट्राइकस्पिड
  • ASD + माइट्रल
  • बाइपास + वाल्व (हाइब्रिड उपचार) की आवश्यकता होती है।

सब कुछ छोटे छिद्रों से सम्भव।

बचपन के कुछ चयनित जन्मजात हृदय रोगों में रोबोट का उपयोग

(भारत में अभी विकसित हो रहा क्षेत्र)

रोबोटिक हृदय-शल्यचिकित्सा के लाभ

न्यूनतम आघात (मिनिमल इनवेसिव)

  • छाती की हड्डी नहीं काटी जाती
  • केवल 5–12 mm के छोटे छिद्र किए जाते हैं
  • मांसपेशियों व ऊतकों को कम क्षति होती है

नतीजा — दर्द कम, रक्तस्राव कम, और तेजी से आरोग्य लाभ (रिकवरी) होता है।

अत्यधिक सटीकता (हाई प्रिसिशन)

रोबोटिक भुजाएँ:

  • हाथ से अधिक स्थिर होती हैं
  • कंपन-रहित (ट्रेमर फ्री) होती हैं
  • 360° घूम सकती हैं
  • माइक्रो-सटीकता (माइक्रोमैट्रिक प्रिसिशन) देती हैं

इससे वाल्व, धमनियों और नाज़ुक संरचनाओं पर अत्यंत सूक्ष्म कार्य सम्भव होता है।

उत्कृष्ट दृश्यता (10× Magnified 3D Vision)

3D-HD कैमरा हृदय की आन्तरिक रचनाओं को नग्न आँख से कहीं बेहतर दिखाता है।
सर्जन को मिलीमीटर स्तर तक स्पष्टता मिलती है।

तेज़ आरोग्य लाभ (रिकवरी) — 2 से 3 सप्ताह

पारंपरिक बाइपास में जहाँ 6–8 सप्ताह लगते हैं,
उधर रोबोटिक सर्जरी में अधिकतर मरीज:

  • 24 घंटे में चलने लगते हैं
  • 3–5 दिनों में अस्पताल से छुट्टी हो जाती है
  • 2–3 सप्ताह में सामान्य कार्य शुरू कर सकते हैं
  • 1 माह में पूर्णतः सक्रिय हो सकते हैं

संक्रमण का कम जोखिम

क्योंकि:

  • बड़ा चीरा नहीं होता
  • हड्डी नहीं काटी जाती
  • घाव छोटे और सुरक्षित होते हैं

यह विशेषकर डायबिटीज एवं वृद्ध मरीजों के लिए उत्तम होता है।

सौन्दर्य परिणाम (Cosmetic Outcomes)

छोटे छिद्र समय के साथ लगभग अदृश्य हो जाते हैं।
युवा रोगियों में यह बहुत महत्त्वपूर्ण लाभ है।

रक्तस्राव व रक्त-संचार की आवश्यकता कम

छोटी कटाई के कारण अक्सर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

कम दर्द

कर्णिक छिद्र (intercostal ports) छोटे होने से दर्द नगण्य होता है।

हड्डी की अस्थायी कमजोरी नहीं

स्ट्रनम कटने से दीर्घकाल में:

  • भारी काम में प्रतिबंध
  • हड्डी के न जुड़ने की आशंका
  • संक्रमण का जोखिम होता है

पर रोबोटिक तकनीक में यह सब नहीं होता।

किन रोगियों में रोबोटिक हृदय-शल्यचिकित्सा उपयुक्त है?

उपयुक्त रोगी:

  • फेफड़ों की सामान्य कार्य-क्षमता

  • हृदय की अनुकूल संरचना

  • अधिक मोटापा नहीं

  • छाती में कोई बड़ा पूर्व-ऑपरेशन न हुआ हो

  • मात्र 1–2 धमनियों में अवरोध की समस्या (CABG के लिए)

  • माइट्रल या ट्राइकस्पिड वाल्व रोग

  • ASD

  • हृदय-ट्यूमर

  • एट्रियल फीब्रिलेशन (मेज़ ऑपरेशन)

निम्न परिस्थितियों में रोबोटिक सर्जरी उपयुक्त नहीं:

  • अत्यधिक मोटापा (मोर्बिड ओबेसिटी)

  • फेफड़ों की गंभीर बीमारी (COPD)

  • छाती में व्यापक कैल्सियम (पोर्सिलेन एयोर्टा)

  • अत्यधिक रक्तस्रावी विकार

  • कई धमनियों में एक साथ गंभीर अवरोध (सिव्यर मल्टी-वेसल कोरोनरी आर्टरी डिजीस)

  • आपातकालीन स्थिति (इमरजेंसी कार्डियक सर्जरी)

रोबोटिक हृदय-शल्यचिकित्सा से पहले आवश्यक तैयारी

रोबोटिक सर्जरी अत्यंत सुरक्षित होती है, लेकिन उसकी तैयारी विस्तृत होती है।

चिकित्सकीय जाँचें:

  • इकोकार्डियोग्राफी

  • CT स्कैन (विशेषतः chest CT)

  • कार्डियक कैथेटराइजेशन / एंजियोग्राफी

  • खून की सामान्य जाँचें

  • फेफड़ों की कार्यक्षमता जाँच (PFT)

स्वास्थ्य सुधार (Optimization):

  • फेफड़ों की साँस एक्सरसाइज़

  • रक्तचाप, शर्करा नियंत्रण

  • एंटीकोआगुलेंट दवाओं का समायोजन

  • शरीर का जल-संतुलन सुधारना

रोगी एवं उसके परिवार को शिक्षित करना:

  • प्रक्रिया का सरल विवरण

  • रिकवरी समय का विवरण

  • आवश्यक सावधानियों का विवरण

  • घर जाने के बाद के निर्देश का विस्तृत वर्णन

रोबोटिक हृदय-शल्यचिकित्सा के बाद स्वास्थ्य-सुधार (रिकवरी)

अस्पताल में:

  • 1–2 दिन ICU

  • 3–5 दिन सामान्य वार्ड

  • 24 घंटे में चलना

  • 72 घंटे में सीढ़ियाँ चढ़ना संभव

घर पर:

  • हल्की चाल प्रतिदिन

  • घाव की स्वच्छ देखभाल

  • धूम्रपान पूर्णतः वर्जित

  • नियमित दवा सेवन

  • तनाव कम करना

  • हृदय पुनर्वास (कार्डियक रिहैबिलिटेशन)

वापसी की समय-रेखा:

गतिविधि

समय

घर लौटना

3–5 दिन

कार्यालय कार्य

2–3 सप्ताह

हल्का व्यायाम

3–4 सप्ताह

पूरी सामान्य गतिविधि

4–6 सप्ताह

रोबोटिक हृदय-शल्यचिकित्सा के संभावित जोखिम (Risks)

हालाँकि जोखिम कम होते हैं, परन्तु मरीज को सटीक जानकारी मिलनी चाहिए।

सम्भावित जोखिम:

  • हल्का रक्तस्राव

  • हृदय की अनियमित धड़कनें (एरिथमिया)

  • छिद्र वाले स्थान पर मामूली संक्रमण

  • दर्द/कसाव

  • दुर्लभ स्थिति में खुली सर्जरी में परिवर्तन

तकनीकी जोखिम:

  • उपकरण की कमी/तकनीकी त्रुटि (अत्यन्त दुर्लभ)

हृदय सम्बन्धी जोखिम:

  • वाल्व/ग्राफ्ट में समस्या

  • दिल की पम्पिंग में अस्थायी गिरावट

कुशल टीम होने पर ये जोखिम न्यूनतम रहते हैं।

रोबोटिक बनाम पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी

 

रोबोटिक सर्जरी

पारंपरिक सर्जरी

छाती की हड्डी

नहीं काटी जाती

काटी जाती है

दर्द

बहुत कम

अधिक

अस्पताल में समय

3–5 दिन

7–10 दिन

रिकवरी

2–3 सप्ताह

6–8 सप्ताह

संक्रमण

कम

अधिक

रक्तस्राव

कम

अधिक

सौन्दर्य

उत्कृष्ट

बड़ा निशान

तकनीकी सटीकता

अत्यधिक

सामान्य

खर्च

थोड़ा अधिक

कम

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या रोबोट अपने आप ऑपरेशन करता है?

नहीं। रोबोट केवल एक साधन है।
हर निर्णय, हर गति, हर कदम — सर्जन के नियन्त्रण में होता है।

हाँ, विश्वभर के अध्ययनों में इसकी सफलता दर उत्कृष्ट पाई गई है।
जहाँ उपयुक्तता मिलती है वहाँ जोखिम अत्यंत कम होते हैं।

सामान्य संज्ञानहरण (General anesthesia)।
मरीज सर्जरी के दौरान पूरी तरह सोया होता है।

प्रारम्भ में थोड़ा अधिक लग सकता है,
लेकिन लाभ— कम दर्द, तेज रिकवरी, कम संक्रमण—अधिक महत्त्वपूर्ण हैं।

प्रारम्भिक लागत अधिक हो सकती है।
लेकिन:

  • अस्पताल में कम समय
  • कम दवाएँ
  • शीघ्र कार्य-आरम्भ
  • कम जटिलताएँ

इससे कुल खर्च कई बार बराबर या कम हो सकता है।

अधिकांश मरीज 2–3 सप्ताह में सक्रिय कार्य करने लगते हैं।

नहीं।
केवल विशेष हाई-वॉल्यूम कार्डियक सेंटर  में ही उपलब्ध होती है।

टीमें हर स्थिति के लिए तैयार रहती हैं।
बहुत दुर्लभ परिस्थितियों में इसे ओपन सर्जरी में परिवर्तित किया जा सकता है — यह पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है।

कुछ प्रक्रियाओं (विशेषकर माइट्रल वाल्व, ASD, ट्यूमर) में रोबोटिक सर्जरी के परिणाम ओपन सर्जरी से भी बेहतर सिद्ध हुए हैं।

यह बीमारी और प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
अधिकतर:

  • रक्त-पतला करने की दवाएँ
  • कोलेस्ट्रॉल-नियंत्रण करने की दवायें
  • रक्तचाप नियंत्रण करने की दवायें

कुछ महीनों तक आवश्यक रहती हैं।

हाँ।
माइट्रल + ट्राइकस्पिड दोनों वाल्व एक साथ सुधारे/बदले जा सकते हैं।

हाँ, यदि उनकी सामान्य स्थिति अनुकूल हो।
कई बार वृद्ध रोगियों को तेज़ रिकवरी के कारण यह और भी लाभकारी होती है।

यह अत्यंत ही दुर्लभ है, तकनीक विश्व-स्तरीय सुरक्षा मानकों पर आधारित है।
उपकरणों का परीक्षण और बैक-अप हर समय उपलब्ध रहता है।

अधिकतर कट दायीं ओर की पसलियों के बीच लगाए जाते हैं
(माइट्रल, ASD, ट्राइकस्पिड, ट्यूमर आदि के लिए)।
CABG में बायीं ओर की पसलियों के बीच पोर्ट लगते हैं।

इस विषय पर किसी भी प्रश्न के लिए यहां लिखें

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