वेंट्रिक्युलर असिस्ट डिवाइसेज़ (VADs)

वेंट्रिक्युलर असिस्ट डिवाइस (VADs) अत्याधुनिक यांत्रिक पम्प हैं जो हृदय के निचले कक्षों — जिन्हें निलय (वेंट्रिकल) कहा जाता है — को शरीर में रक्त पम्प करने में सहायता प्रदान करते हैं।
जब हृदय अत्यधिक दुर्बल हो जाता है और स्वयं रक्त प्रवाह बनाए रखने में असमर्थ हो जाता है, तब ये उपकरण जीवन-रक्षक सिद्ध होते हैं।

रोग की गंभीरता के अनुसार VAD:

  • बाएँ निलय (LVAD)

  • दाएँ निलय (RVAD)

  • दोनों निलयों (BiVAD)

में से किसी एक अथवा दोनों का समर्थन कर सकता है।

ये उपकरण अल्पकालिक अथवा दीर्घकालिक — दोनों प्रकार के उपयोग में आते हैं।

VAD का उद्देश्य

एडवांस्ड हार्ट फेलियर में VAD अनेक महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाते हैं:

  • ब्रिज टू ट्रांसप्लांट (Bridge to Transplant – BTT)
    हृदय-प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करते समय रोगी को दाता हृदय (डोनर हार्ट) उपलब्ध होने तक स्थिर बनाए रखता है।
  • डेस्टिनेशन थैरेपी (Destination Therapy – DT)
    VAD उन रोगियों हेतु दीर्घकालिक विकल्प के रूप में प्रयोग होता है जो प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) हेतु पात्र नहीं हैं।
  • ब्रिज टू रिकवरी (Bridge to Recovery – BTR)
    VAD का प्रयोग हृदय को अल्पकालिक समर्थन देने के लिए किया जाता है, जब तक हृदय पुनः बल प्राप्त कर सामान्य कार्य करने लगे।
  • ब्रिज टू डिसीजन (Bridge to Decision – BTD)
    VAD का प्रयोग चिकित्सकों को यह निर्धारित करने में सहायता देता है कि रोगी को प्रत्यारोपण, दीर्घकालिक VAD अथवा रिकवरी में से क्या उपयुक्त है।
  • गंभीर कार्डियोजेनिक शॉक में सहायता
    जब हृदय अचानक अत्यधिक दुर्बल हो जाए VAD  का प्रयोग तत्कालिक रूप से किया जाता है।
  • बड़ी हृदय-शल्यक्रिया के बाद अस्थायी सहायता
    कुछ रोगियों में ऑपरेशन के बाद जब हृदय पर्याप्त बल से कार्य नहीं कर पाता VAD  का प्रयोग अस्थायी सहयोग के लिए किया जाता है।

वेंट्रिक्युलर असिस्ट डिवाइस कैसे कार्य करता है?

VAD हृदय की पम्पिंग क्रिया को निभाते हुए शरीर के सभी महत्त्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजनयुक्त रक्त पहुँचाता है।

VAD के मुख्य अवयव:

  1. पम्प
    पम्प को छाती के भीतर स्थापित किया जाता है और यह वेंट्रिकल (निलय) से रक्त को आगे की ओर भेजता है।

  2. ड्राइव-लाइन
    यह एक पतला तार होता है जो त्वचा से होकर बाहर आता है और पम्प को नियंत्रक (जेनरेटर) से जोड़ता है।

  3. कंट्रोलर
    एक छोटा कंप्यूटर है जो पम्प की गति, प्रवाह और चेतावनी संकेतों को नियंत्रित करता है।

  4. विद्युत-शक्ति स्रोत
    रिचार्ज होने वाली बैटरियाँ अथवा एसी-एडॉप्टर, जो पम्प को निरंतर शक्ति प्रदान करते हैं।

ध्यान रहे: VAD को शरीर में रहते हुए कभी भी बन्द नहीं किया जाता।

LVAD कैसे काम करता है?

  • यह बाएँ निलय से रक्त खींचता है।

  • उसे महाधमनी (ऐयोर्टा) में पम्प करता है।

  • इसके माध्यम से पूरा शरीर ऑक्सीजनयुक्त रक्त प्राप्त करता है।

अधिकांश आधुनिक LVAD निरंतर (continuous) प्रवाह देते हैं, इसलिए अनेक रोगियों में स्पष्ट नाड़ी (pulse) नहीं मिलती यह सामान्य है।

वेंट्रिक्युलर असिस्ट डिवाइस के प्रकार

1. लेफ्ट वेंट्रिक्युलर असिस्ट डिवाइस (LVAD)

  • पूरे शरीर में रक्त पम्प करने वाले बाएँ निलय (लेफ्ट वेंट्रिकल) को समर्थन देता है।
  • अंतिम चरण की हृदय-असफलता में इसका सर्वाधिक उपयोग होता है।
  • LVAD का प्रयोग प्रत्यारोपण तक सेतु (BTT) या दीर्घकालिक उपचार (DT) दोनों में होता है।

2. राइट वेंट्रिक्युलर असिस्ट डिवाइस (RVAD)

  • RVAD दाएँ निलय (राइट वेंट्रिकल) को समर्थन देता है जो रक्त को फेफड़ों तक पहुँचाता है।
  • अक्सर LVAD लगाने के बाद दाएँ निलय की कमजोरी में इसका अल्पकालिक उपयोग करने की आवश्यकता पड़ती है।

3. बाइवेंट्रिक्युलर असिस्ट डिवाइस (BiVAD)

  • BiVAD दोनों निलयों को एक साथ समर्थन देता है।
  • अत्यधिक गंभीर बायवेंट्रिक्युलर फेलियर में BiVAD का उपयोग होता है।

4. अस्थायी/अल्पकालिक VAD

इनका प्रयोग Impella, TandemHeart, ECMO आधारित परिसंचरण के समर्थन के लिए किया जाता है।
कार्डियोजेनिक शॉक में अल्पकालिक हेतु उपयोग।

VAD लगाने के लिए पात्र कौन होते हैं?

VAD की सलाह उन रोगियों में दी जाती है:

  • जिन्हें गंभीर हृदय-असफलता  (heart failure) है और औषधियों से लाभ नहीं हो रहा

  • जिन्हें प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा है

  • जिनमें (डायलेटेड/इस्केमिक) कार्डियोमायोपैथी है

  • जिन्हें आयु या अन्य रोगों के कारण तुरंत प्रत्यारोपण संभव नहीं

  • जिनका कई बार हृदय-असफलता (हार्ट फेलियर) के कारण अस्पताल में प्रवेश हो चुका है

  • जिनके हृदय की पंपिंग क्षमता में (Cardiac Output) में कमी आ चुकी है

VAD से पहले जाँच होती है:

  • इकोकार्डियोग्राम

  • कार्डियक कैथेटरीकरण

  • CT स्कैन

  • खून की जाँच

  • गुर्दा एवं यकृत के कार्य क्षमता की जांच

  • पोषण एवं मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन

VAD प्रत्यारोपण प्रक्रिया की रूपरेखा

यह एक सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित प्रक्रिया है जो अनुभवी कार्डियक सर्जरी दल द्वारा की जाती है।

चरण:

  1. रोगी को सम्पूर्ण बेहोशी दी जाती है।

  2. छाती के मध्य में चीरा देकर छाती की हड्डी खोल कर हृदय तक पहुँचा जाता है।

  3. पम्प को निलय (वेंट्रिकल) और महाधमनी या फुफ्फुसीय धमनी (एयोर्टा अथवा पल्मोनरी आर्टरी) से जोड़ा जाता है।

  4. ड्राइव-लाइन को त्वचा के नीचे से बाहर निकाला जाता है।

  5. बाहरी कंट्रोलर (जेनेरेटर) और बैटरी से जोड़ा जाता है।

  6. सक्रिय होते ही VAD हृदय को तुरंत समर्थन देना प्रारम्भ कर देता है।

VAD के लाभ

  • अंतिम चरण की हृदय-असफलता (हार्ट फेलियर) में जीवन-रक्षा होती है

  • ऊर्जागतिशीलता और जीवन-स्तर में सुधार आता है

  • सांस फूलना, थकान, पैरों की सूजन जैसे लक्षणों में कमी आती है

  • प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सुरक्षित रूप से लंबे समय तक की जा सकती है

  • प्रत्यारोपण के अयोग्य रोगियों में दीर्घकालिक समाधान के रूप में प्रयोग किया जा सकता है

  • अंगों में रक्त प्रवाह सुधारकर गुर्दे, यकृत, मस्तिष्क को सुरक्षित रखता है

आज VAD ने हृदय-असफलता (हार्ट फेलियर) को एक दीर्घकालिक रूप से प्रबंधन किए जाने योग्य स्थिति में बदल दिया है।

VAD लगने के बाद जीवन और देखभाल

रोगी और परिजन को यह प्रशिक्षण प्राप्त करने की आवश्यकता होती है कि

  • कंट्रोलर का संचालन किस प्रकार करना है

  • बैटरी बदलने की प्रक्रिया कैसे संपन्न की जाती है

  • ड्राइव-लाइन की स्वच्छता कैसे बरक़रार रखनी है

  • चेतावनी संकेत क्या हैं

  • आपात स्थितियों में क्या करें

जीवनशैली संबंधी परामर्श जिनका पालन करना अनिवार्य होता है:

  • पानी में डुबकी/तैराकी से बचें (इससे संक्रमण का जोखिम बढ़ता है)

  • संपर्क खेल (कांटैक्ट स्पोर्ट्स) से परहेज़ करें

  • कम नमक वाले भोजन का सेवन करें

  • रक्त-पतला करने वाली दवा नियमित रूप से लें

  • वजन और रक्तचाप की नियमित जाँच करें

  • VAD टीम से निरंतर सम्पर्क में रहें

अधिकांश रोगी कुछ ही सप्ताह में सामान्य गतिविधियाँ करने लगते हैं।

VAD लगने के बाद दीर्घकालिक देखभाल

कुछ जांचें नियमित अंतराल पर की जानी चाहिए

  • INR/खून पतला करने वाली दवा की जाँच

  • पम्प गति और प्रवाह की जाँच

  • इकोकार्डियोग्राम

  • ड्राइव-लाइन संक्रमण की जाँच

  • CT स्कैन (यदि आवश्यक)

आपात स्थिति के संकेत:

  • कंट्रोलर अलार्म

  • पम्प प्रवाह में कमी

  • चक्कर, बेहोशी आना

  • खून बहना

  • ड्राइव-लाइन में क्षति पहुंचना

VAD लगने के बाद संभावित जोखिम एवं जटिलताएँ

VAD की तकनीक में कई सुधार आने के कारण यह दिन-प्रतिदिन अधिक से अधिक सुरक्षित प्रक्रिया होती जा रही है, फिर भी कुछ जटिलताएँ हैं जिनका सामना VAD के प्रत्यारोपण के बाद करना पड़ता है

  • ड्राइव-लाइन संक्रमण

  • रक्त के थक्के (Clots) → स्ट्रोक का जोखिम

  • अत्यधिक रक्तस्राव

  • LVAD लगाने के बाद दाएँ निलय की कमजोरी (राइट वेंट्रिकल फेलियर आफ्टर LVAD)

  • उपकरण संबंधी समस्या या बैटरी खराबी

  • पम्प के भीतर थक्का जमना (पंप थ्रोम्बोसिस)

अनुभवी टीम और नियमित जाँच से इन जोखिमों को न्यूनतम किया जा सकता है।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या VAD लगने के बाद नाड़ी महसूस होती है?

अधिकांश आधुनिक LVAD निरंतर प्रवाह देते हैं, इसलिए नाड़ी न मिलना पूरी तरह सामान्य है।

हाँ। कार, ट्रेन, या हवाई यात्रा संभव है — बस बैटरी और उपकरण बैकअप साथ रखना आवश्यक है।

हाँ, जब डॉक्टर अनुमति दें और रिकवरी पूर्ण हो जाए।

कई रोगी 5–10 वर्ष या उससे भी अधिक जीते हैं, उचित देखभाल के साथ।

हाँ, यदि हृदय पर्याप्त बल प्राप्त कर ले (Bridge to Recovery), तो VAD हटाया जा सकता है।

हाँ, हल्की गुंजन/हम्मिंग ध्वनि सामान्य है।

कंट्रोलर पहले से चेतावनी देता है। रोगी सदैव अतिरिक्त बैटरियाँ और एसी एडॉप्टर साथ रखते हैं।

हाँ, पूर्ण रिकवरी और चिकित्सकीय अनुमति के बाद अधिकांश रोगी गाड़ी चला सकते हैं।

हाँ। ज़्यादातर मरीज़ आसानी से सामंजस्य स्थापित कर लेते हैं। वे कंट्रोलर को सुरक्षित रूप से पास रखकर सोते हैं।

अधिकांश आधुनिक LVAD निरंतर (continuous) रक्त प्रवाह देते हैं, इसलिए सामान्य तरीके से नाड़ी पकड़कर रक्तचाप मापना संभव नहीं होता।
इस कारण रक्तचाप निम्न तरीकों से मापा जाता है:

  • डॉप्लर अल्ट्रासाउंड विधि

    एक छोटे डॉप्लर उपकरण से रक्त प्रवाह की ध्वनि सुनी जाती है, जबकि बांह पर BP कफ फुलाया जाता है।

    जिस दबाव पर रक्त प्रवाह की ध्वनि पुनः सुनाई देती है, उसे MAP (Mean Arterial Pressure) माना जाता है।

  • MAP ही मुख्य मापदण्ड होता है

    LVAD रोगियों के लिए आदर्श MAP: 70–90 mmHg

    (सामान्य सिस्टोलिक/डायस्टोलिक मान नहीं उपयोग किए जाते।)

ऑटोमैटिक BP मशीनें अक्सर सही माप नहीं दे पातीं, इसलिए डॉप्लर विधि सबसे विश्वसनीय मानी जाती है।

इस विषय पर किसी भी प्रश्न के लिए यहां लिखें

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